ईसाइयों की धर्मसभा के फरमान को न मानने का एलान किया नन लूसी ने.. बन रही हैं नारी शक्ति की एक नई प्रतीक जिनका साथ नही दे रहा कोई आयोग

ये वो नई नारी शक्ति के रूप में सामने आ रही हैं जो निश्चित तौर पर सबसे कड़ी लड़ाई लड़ रही है क्योकि इसमें उनके साथ न ही नारी के सम्मान का ढोंग पीटने वाले लोग हैं और न ही कोई आयोग . कोई भी ऐसा अब नहीं दिखाई दे रहा है जो इनके लिए सडको पर उतरे लेकिन यहाँ उस हिम्मत को दाद देनी पड़ेगी जिसमे पहले एक कद्दावर बलात्कारी बिशप के खिलाफ बुलंद आवाज उठाई फिर उसके बाद उस बलात्कारी के बजाय इसी महिला को सजा देने वाली धर्म सभा को नकारा ..

खुद को निष्काषित किये जाने की घटना के बाद भी सबसे शक्तिशाली लोगों के खिलाफ लड़ने वाली इस नन के हौसले पस्त नहीं हुए और इन्होने अब सीधा जवाब दिया है उन सभी को . कन्नूर की रहने वाली लूसी कलापुरा एक चर्च-संचालित सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल की टीचर हैं और वायनाड के कारिकमला गांव में एफसीसी कॉन्वेंट की सदस्य भी थीं. पिछले साल, वे बिशप फ्रैंको मुलक्कल की गिरफ्तारी की मांग कर रहीं नन्स के आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थीं.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार FCC के आदेश के बाद भी किसी भी हाल में पीछे न हटने का एलान करने वाली नन लूसी कलापुरा ने कहा है कि –  “मुझसे दस दिनों के अंदर कॉन्वेंट छोड़ने के लिए कहा गया है, लेकिन मैं यह परिसर छोड़कर कहीं नहीं जा रही. मैं पिछले 33 सालों से नन हूं. वे मुझे इस तरह बर्खास्त नहीं कर सकते. मैं एक वकील से सलाह लेने के बाद कानूनी विकल्प देखूंगी. मैं लड़ना चाहती हूं और एक महिला के रूप में मुझे सुरक्षा की जरूरत है. जरूरत पड़ने पर मैं पुलिस सुरक्षा की भी मांग करूंगी.”

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