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अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने दो दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

नई दिल्ली : 2007 के अजमेर ब्लास्ट मामले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने मामले में दोषी पाए गए भावेश पटेल और देवेंद्र गुप्ता का उम्रकैद की सजा सुनाई है और साथ ही कोर्ट ने देवेंद्र पर 10 हजार और भावेश पर 5 हजार का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि इससे पहले 8 मार्च को NIA कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था, लेकिन सजा बुधवार को सुनाई गई है।

इस केस में जिन लोगों को दोषी पाया गया था उसमें सुनील जोशी, भावेश और देवेंद्र गुप्ता का नाम शामिल था। सुनील जोशी की पहले ही मौत हो चुकी है। इस मामले में 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन कुछ दिन पूर्व ही शेष 11 लोगों को बरी कर दिया गया था। बता दें कि अजमेर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में आहता—ए—नूर पेड़ के पास 11 अक्टूबर 2007 को बम विस्फोट हुआ था। 11 अक्टूबर 2007 को दरगाह परिसर में हुए बम विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 15 लोग घायल हो गए थे।

विस्फोट के बाद पुलिस को तलाशी के दौरान एक लावारिस बैग मिला था। जिसमे टाइमर डिवाइस लगा जिंदा बम रखा था। 2007 में इस केस में सिर्फ दो FIR रजिस्टर की गई थी। इसके बाद 2011 में इस केस को NIA को सौंप दिया गया था। इस मामले में 13 लोग आरोपी थे। जिनमें स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लेवे, मुकेश वासनानी, लोकेश शर्मा, हर्षद भारत, मोहन रातिश्वर, संदीप डांगे, रामचंद कलसारा, भावेश पटेल, सुरेश नायर और मेहुल शामिल थे।

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