कर्मों का दण्ड भोगना ही पड़ता है. ठीक वैसे जैसे अब भोगेंगे निठारी के नर पिशाच

नर पिशाच जैसे नाम तो शायद हम सभी ने फिल्मों और नाटकों में ही सुने थे. लेकिन 2006 से पहले कौन जनता था कि ऐसे जाती असल में भी मौजूद हैं. लेकिन फिल्मों और असल ज़िन्दगी के नर पिसाच में थोड़ा फर्क है, फिल्मों में नर पिशाच लोगों का खून पीकर उन्हें मार डालते थे और असल ज़िन्दगी के नर पिशाच उनका शोषण करने के बाद उनकी हत्या कर देते थे उसके बाद भी उनका मन नहीं भरा तो वह अपने शिकार के शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े कर डालते थे.

2006 में नॉएडा के निठारी गांव की कोठी नंबर 5 में दो नर पिशाच मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली पुलिस द्वारा दबोचे गए. शायद वह पकडे भी न जाते अगर उस दिन 20 साल की पिंकी सरकार नाम की लड़की को वह दोनों अपना शिकार नहीं बनाते, लेकिन अपराध छुपाये नहीं छुपता. दरअसल, पिंकी कोठी नंबर 5 के बाहर रिक्शा से उतरी थी और पैसे पिंकी ने रिक्शा वाले को कोठी से लौटकर देने के लिए कहा था लेकिन पिंकी काफी देर तक वापस नहीं आयी तो रिक्शा वाले ने कोठी का दरवाज़ा खटखटान शुरू कर दिया.

खटखटाने पर नौकर सुरेंद्र कोली बाहर आया और बोला की पिंकी तो कब की चली गयी लेकिन रिक्शा वाला बहुत देर से दरवाजे के पास ही खड़ा था और उसने पिंकी को बहार आते नहीं देखा. यह बात पायल के घरवालों तक पहुंची. इसके बाद पायल के पिता नंदलाल ने एफआईआर लिखवाई कि उसकी बेटी कोठी से गायब हो गई. पुलि‍स पूरी तरह जांच में जुट गई. जिसके बाद निठारी कांड का खुलासा हुआ. और आज 11 साल बाद मोदी सरकार राज में कुकर्मी मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को फ़ांसी की सजा सुनाई गई. शायद इससे कड़ी सजा दी जा सकती इन दरिंदो को, अगर हमारे देश में कुछ ऐसे लोग और नेता मौजूद न होते जो मानवाधिकार के नाम पर गुनाहगारो को सज़ा देने से रोकते हैं.

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