संत रहे खामोश तो श्रीराम के बाद अब अदालत में निशाने पर आये अखाडे.. वो अखाडे जो प्रथम स्नान का अधिकार पाते हैं कुम्भ में


अभी कुछ दिन पहले जिस प्रकार से अदालत में कभी वेदों पर आक्षेप किया गया तो कभी पुराणों पर तो ऐसा लगा कि इसका प्रतिरोध संत जरूर करेंगे लेकिन भारत के तमाम धर्मनिरपेक्ष संतो ने खुद को भारत के सेक्युलर ढांचे में अच्छे से ढाल रखा था इसलिए वो कभी सब कुछ भगवान के भरोसे तो कभी अदालत के भरोसे छोड़ कर आगे बढ़ते रहे . उसके बाद इस अपमान की सीमा सीधे सीधे श्रीराम तक पहुच गई जिस पर तमाम संतो ने फिर से धर्मनिरपेक्ष ख़ामोशी रखी ..

लेकिन अब उसी मुस्लिम पक्ष की तरफ से निशाने पर आ गये हैं अखाड़े.. वो अखाड़े जो कुम्भ तक में सबसे पहले स्नान का अधिकार रखते हैं और करोड़ों हिन्दुओ की आस्था के केंद्र हुआ करते हैं अब उन अखाड़ो पर भी लगने लगे आक्षेप.. उनकी प्रमाणिकता और उनके इतिहास पर उठाई जाने लगी ऊँगली.. इस से पहले जब हिन्दू पक्ष ने बहस की थी तो उन्होंने अपनी बहस को सिर्फ बाबरी और बाबर तक सीमित रखा था जो निसंदेह रूप से एक आतताई और लुटेरा था..

हिन्दू पक्ष ने कभी भी इस्लाम के मूल नियमो पर ऊँगली नहीं उठाई . यहाँ तक कि हिन्दू पक्ष ने अपनी जिरह में इस्लामिक पुस्तको तक का हवाला दिया था पर मुस्लिम पक्ष ने तो एक के बाद एक सभी सीमओं को पार कर दिया . फिर भी तमाम संतो की ख़ामोशी इस बात का परिचायक है कि उन्होंने अदालत और भगवान के भरोसे सब छोड़ दिया है . ताजा चल रही बहस में अब निशाने पर आ गया है निर्मोही अखाडा जो कब से है और कैसे है आदि पर जोर देर रहा है मुस्लिम पक्ष .

आखिर आने वाले समय में ये सवाल जरूर उठेगा कि हिन्दू की आस्था के किस बिंदु को उन्होंने कुचला नहीं था बहस के बहाने . मुस्लिम पक्ष के अनुसार ‘किसी ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा 700 साल पहले अस्तित्व में आया तो कुछ ने कहा कि यह 250 साल पहले वजूद में आया. एक गवाह ने कहा कि भगवान राम 12 लाख वर्ष पहले अवतरित हुए थे.’’  कहा गया कि निर्मोही अखाड़ा के कई गवाहों ने अपनी गवाही में ‘बढ़ा-चढ़ाकर’ दावे’ किये. मुस्लिम पक्ष ने आगे कहा कि शैबैत’अधिकार सिर्फ स्थल के प्रबंधन और पूजा आदि तक सीमित हैं और यह ‘अखाड़ा’ के किसी भी स्वामित्व के दावे को जन्म नहीं देता. इस मामले के मूल वादकार एम सिद्दीक समेत सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य की तरफ से उपस्थित थे.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...