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हर विभाग में उर्दू को हक़ दिलाने के लिए संघर्ष का एलान . एलान करने वाले का नाम है “धर्म वीर सिंह” जो असल में “धर्म निरपेक्ष” हैं

ये समाज में सेकुलरों के लिए एक बड़ा उदाहरण हैं . इन्होने धर्मनिरपेक्षता की एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा . इनके नाम में धर्मवीर होने के बाद भी इनकी धर्मनिरपेक्ष छवि ने समाज में एक अलग ही जगह इनकी बना डाली है . देववाणी कही जाने वाली संस्कृत जैसी भाषाएं भले ही लुप्त होने की कगार पर आ चुकी हों लेकिन उसी समय उर्दू को बढ़ावा देने के लिए संघर्ष करना और सरकार से उसकी प्रमुखता से मांग करना अपने आप में एक मिसाल है जो बना रहे हैं धर्मवीर सिंह .

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डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय कि उर्दू विभाग कि अध्यक्ष डॉ धर्मवीर सिंह ने कहा कि “हमारी सरकार की नीति हमेशा से उर्दू विरोधी रही है। यह बहुत दुख की बात है कि विदेशों के छात्र हमारे देश कदम विश्वविद्यालय में उर्दू शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं , लेकिन सरकार उर्दू को बढ़ावा देने के लिए कोई बुनियादी कदम नहीं उठा रही है। उनके इस बयान से खुश हो कर और उत्साहित हो कर ‘फेडरेशन फॉर एजुकेशनल डेवलपमेंट के महासचिव और संस्थापक, शकील अहमद सिद्दीकी ने भारत में उर्दू के पतन के बीच प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि चाहे जो हो जाये हम दिल्ली के हर विभाग में उर्दू को उसका जाएज़ हक़ दिला कर दम लेंगे।

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इसी क्रम में एक अन्य सेकुलर स्वभाव के व्यक्तित्व ने भी अपने विचार सामने रखे .. एनआईओएस के संयुक्त निदेशक टी एन गिरी ने बहुत भावुक तरीके से व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे उर्दू भाषा बहुत पसंद है क्योंकि मेरी पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई है।” उन्होंने में मदरसों और दूसरे उर्दू इदारों से अपील की को उनको जब भी उनकी ज़रूरत पड़े वो खिदमत कि लिए तैयार हैं, उनको अपना उर्दू विभाग रजिस्ट्रेशन कराना हो तो हम से राब्ता करें।

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इस सेमिनार का आयोजन कम्युनिटी हॉल, सीमापुरी, नई दिल्ली में क़ौमी कौंसिल उर्दू ज़बान कि साझा में किया गया, जिसकी अध्यक्षता फेडरेशन के अध्यक्ष और पूर्व स्कूल प्रिंसिपल मोहम्मद अख्तर खान और निज़ामत अतहर सईद और रेशमा फारूकी ने की।मुख्य तौर से चौधरी मुस्तक़ीम, मोहम्मद अकिल, मुहम्मद कामिल, जावेदउल हक, शाहिदा शकिल, मौलाना नसीम फारूकी, मोहम्मद यामीन सलमानी, एनए ए करीमी, मास्टर निसार अहमद, आरिफ हुसैन, मौलाना मुश्ताक, मुहम्मद नौमान, राशिद, अलीशा, वक़ार सिद्दीक़ी, नदीम अहमद, हाजी अकरम, मोहम्मद शहज़ाद, शाज़िआ अदि मौजूद रहीं जिसमे आकर्षण का मुख्य केंद्र धर्मवीर सिंह ही थे .

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