अलीगढ़ में हो रहा था “मुसलमान” शब्द कहने का विरोध … अब कठुआ मामले में वही गैंग लिख रही “हिंदुत्व” शब्द प्रमुखता से

पिछले कुछ समय से जिस अलीगढ ने इंसानियत की धज्जी उड़ते अपनी आँखों से देखा था उसके अभियुक्तों के नाम से सब जाहिर होने के बाद भी स्वघोषित सेकुलर ब्रिगेड का एक बड़ा वर्ग बार बार कह रहा था कि कुछ भी हो जाए , किसी बच्ची आदि के मामले में धर्म या जाति आदि की बात नहीं होनी चाहिए . यहाँ तक कि इस मामले में बाकायदा विक्टिम कार्ड भी खेला जाने लगा था और उतार दिया गया था कुछ ख़ास सिपहसालारों को ये घोषित करने के लिए कि अलीगढ में मुस्लिम डरे हुए हैं .

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इस मामले में मुंबई के बॉलीवुड का एक बड़ा वर्ग भी खामोश दिखाई दिया था और मात्र एक ट्विट के लिए भी उनको खोजा गया था आम जनता द्वारा . राजनैतिक क्षेत्र में दिल्ली को अरविन्द केजरीवाल जैसा नेता दिलाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले योगेन्द्र यादव जैसे लोगों ने तो अलीगढ पुलिस की बाकायदा तारीफ भी की थी कि उन्होंने इस मामले में हिन्दू मुस्लिम आदि नहीं आने दिया .. इस नृशंसता पर भी हिन्दू समूहों को निशाने पर लिया गया असल दर्द की चर्चा भूल कर .

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लेकिन जैसे ही मामला कठुआ का सामने आया है वैसे है अचानक वही स्वघोषित सेकुलर लॉबी सक्रिय हो गई है . अचानक ही इस मामले में धर्म दिखाई देने लगा है और सबसे पहले बाकायदा नाम के साथ घोषित कर दिया गया इस मामले को “हिंदुत्व” से जुडा हुआ .. अब वो तमाम भाईचारे और एकता की बातें दिखाई देना बंद हो गई है और एक हथियार जैसा प्रयोग में लाया जा रहा है इस पूरे फैसले को .. देखिये वो प्रमाण जिस से लगेगा कि कहीं न कहीं कुछ की बातों में दोगलापन जरूर है .

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