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शरिया की आहट अब भारत की सेकुलर मीडिया में भी.. देवबंद का फ़तवा – “महिला टी वी एंकर बांधे स्कार्फ, या पहनें बुरका”

आये दिन अपने नए नए फतवों से जब इस्लामिक संस्था दारुल उलूम कभी नाखून पोलिश को हराम बता रहा था, कभी ब्यूटी पार्लर को हराम बता रहा था तब भारत का एक बड़ा वर्ग अपने स्वघोषित व स्वरचित धर्मनिरपेक्ष होने का प्रमाण देते हुए उस पर ख़ामोशी रखे हुए था .. उस समय चर्चा केवल इन बिंदुओं पर होती थी कि गौ रक्षक गुंडे हैं या नही , शनि देव या शिरडी का सत्य क्या है . इतना ही नही, कुछ स्वघोषित पत्रकार तो सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक श्री सुरेश चव्हाणके जी से उग्र हिंदुत्व की परिभाषा पूछ रहे थे.. अचानक ही आई एक खबर जो उनके सेकुलर सिद्धांतो की उर्वरा भूमि से उपजी हुई एक उपज थी..

विदित हो कि भारत के लगभग हर क्षेत्र में अपने कानूनों की दखल देने वाले दारुल उलूम देवबंद ने अब अपनी धमाकेदार दखल दी है भारत के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया में भी .. दारुल उलूम देवबंद के अनुसार टी वी पर खबर पढ़ने के लिए आने वाली महिला एंकरों को बाल खुले रखना हराम है और वो इनको छिपाने के लिए अपने बालों को बांधने के बाद स्कार्फ पहन कर ही समाचार पढ़ने आया करें.. इस से पहले खाप पंचायतों के लड़कियों के लिए एहतियातन उठाये जाने वाले कदमों पर लगातार बहस होती रही है पर इस मुद्दे पर कई लोग खामोश हो कर इनको मूक समर्थन व मूक सहमति देते प्रतीत हो रहे हैं ..साथ ही इस पर नारी सम्मान की दुहाई देने वाले बड़े बड़े समूह भी खामोश नजर आ रहे हैं ..

अभी कुछ समय पहले ही महिला व पुरुष को साथ न खाना खाने के फरमान के बाद चर्चा में आये देवबंद को राष्ट्रीय महिला आयोग ने नोटिस भी जारी किया था लेकिन उसके बाद भी देवबंद ने ये दिखाते हुए की उसको कोई फर्क नही पड़ा, ये नया फ़तवा महिलाओं के लिए जारी कर दिया जिसमें लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रुप में मानी जाने वाली महिला पत्रकार भी शामिल हैं..देवबंद के मुफ्ती अहमद ने मुस्लिम महिलाओं के लिए बयान दिया है कि टीवी पर जो मुस्लिम महिलाएं एंकरिंग या रिपोर्टिंग कर रही हैं, उन्हें स्‍कार्फ बांधकर काम करना चाहिए.

इस से उनके बाल खुले नहीं रहेंगे, बेहतर होगा कि वे बुर्के का इस्‍तेमाल करें. दारूल उलूम देवबंद ने अपने फतवे में कहा है कि शरीयत ने सभी औरत और मर्दों को इजाजत दी है कि वह कोई भी जायज रोजगार कर सकते हैं. घर की जरूरत पूरी करने के लिए अपने अहले खाना की जरूरत पूरी करने के लिए सब तरह के काम कर सकते हैं. इसमें कोई हर्ज नहीं है. इसमें कहा गया है कि टीवी पर एंकरिंग करने के लिए बेहतर तरीका इस्लाम की शरीयत ने बताया है.

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