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राजू पाल को मार कर अतीक अहमद सोच रहा था कि सब सही हो जाएगा.. लेकिन उसको नहीं पता था कि सरकार बदलेगी और समय भी

ये वो अपराधी था जो खुद को बाहुबली सुन कर अट्टहास करता था.. इसको लगता था कि आस पास कुछ बंदूक वालों को साथ घुमा कर इसके बराबरी में कोई दूसरा नहीं रह जाएगा.. उसने अपनी दादागीरी इस हद तक बढ़ा डाली थी कि दिन दहाड़े अस्पताल में घुस कर उसने एक विधायक को मार डाला था और उसके बाद चुनाव भी जीत गया था . उसको शायद पता ही नहीं था कि समय परिवर्तनशील है और वो जब बदलता है तो आमूलचूल बदलाव लाता है और वो बदलाव दिख भी रहा है .

25 जनवरी, 2005 को इलाहाबाद पश्चिमी से बसपा विधायक राजू पाल की दिन-दहाड़े गोलीबारी में हत्या कर दी गई थी। इस गोलीबारी में देवी पाल व संदीप यादव की भी मौत हुई थी। जबकि दो लोग गंभीर रुप से घायल हुए थे। इस हत्याकांड से ठीक 16 दिन पहले विधायक राजू पाल की पूजा पाल से शादी हुई थी। पूजा पाल ने थाना धुमनगंज में इस हत्या की एफआईआर दर्ज कराते हुए अतीक व उसके भाई अशरफ उर्फ खालिद आदिम को नामजद किया था।

सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुराधा शुक्ला ने बसपा विधायक रहे राजू पाल की हत्या के मामले में संज्ञान लेते हुए पूर्व सांसद अतीक अहमद, उसके भाई पूर्व विधायक अशरफ और अन्य को 21 सितंबर को पेश होने को कहा है। अतीक और उसके भाई अशरफ के अलावा मामले में अन्य आरोपी रंजीत पाल, आबिद, फरहान अहमद, इसरार अहमद, जावेद, रफीक अहमद, गुलशन और अब्दुल हैं।

 

 

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