Breaking News:

उर्दू में आ रही है श्री राम कथा.. प्रभु को बोला गया – “इमाम-ए-हिंद : राम – सबके राम”

भले ही आज कुछ लोग अदालत तक भगवान श्रीराम के जन्मभूमि पर एक भव्य मन्दिर निर्माण के विरोधी हो कर उनके तम्बू में रखने के बाद भी खुद को सेकुलर कहते हों लेकिन तमाम ऐसे लोग भी हैं जो आज भी अपने मत और विचारधारा को बदलने के बाद भी खुद को उस नाम से अलग नहीं कर पाए हैं जो उनके पुरखे लिया करते थे.. हिन्दू धर्म ही नहीं मानव सभ्यता के सर्वोत्तम उदहारण श्रीराम का सम्मान हर वर्ग में है मात्र कुछ अतिकट्टरपन्थियो को छोड़ कर जो अपने देश तक का विरोध करते हैं .

वेदों, पुराणों के साथ पवित्र परिक्रमा तक को क्या क्या कहा गया अदालत में.. हिन्दुओ को बता दिया गया अपने श्रीराम के मन्दिर के “घुसपैठिये”

अब प्रभु श्रीराम की कथा को उर्दू तक में गाया जाएगा और ये संदेश जाएगा दुनिया के कोने कोने में उर्दू समझने वाले उन तमाम लोगों को जो बेहतर ढंग से अभी भी जानते हैं कि उनके पूर्वज कौन थे और उनकी मूल पद्धति क्या थी .. इसी क्रम में राजधानी नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में डॉ. मोहम्मद अलीम द्वारा लिखित नाटक इमाम -ए- हिंद : राम के देश के सौ शहरों में मंचन का ऐलान किया गया । रविवार 1 सितम्बर 2019 को इमाम-ए-हिंद: राम (नाटक) पुस्तक का विमोचन हुआ ।

खाप पंचायतों पर तो शुरू हो जाती है बहस लेकिन बहराइच के जमशेद ने अपनी बहन के साथ जो किया उस पर ख़ामोशी क्यों ?

इस अवसर पर “इमाम-ए-हिंद : राम – सबके राम” विषय आधारित संवाद आयोजित किया गया । इस संवाद में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री, प्रख्यात चिंतक श्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे और हम सब उसी डोर से बंधे हुए हैं . श्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संस्कृति का ताल्लुक आस्था से नहीं होता है, संस्कृति का ताल्लुक वातावरण, जलवायु, सभ्यता और आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों से होता है…

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए हमें सहयोग करें. नीचे लिंक पर जाऐं–

Share This Post