अयोध्या में संस्कृत महाविद्यालय की घोषणा पर चुप रहे बाकी दल, लेकिन संतों ने एक स्वर में बोला- “मोदी जी धन्यवाद”

जहां एक ओर अयोध्या में संस्कृत महाविद्यालय की घोषणा पर संतों ने प्रदेश व केन्द्र सरकार को धन्यवाद दिया है तो वहीं, दुसरी तरफ इस घोषणा पर बाकी दल ने चुपी साध रखी है। इस घोषणा पर मणिराम दास छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास महाराज ने कहा कि अयोध्या मे बहुत पहले ही संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हो जानी चाहिए थी। 
इस प्रदेश मे मात्र एक ही सम्पूर्णानंद विश्वविद्यालय है जोकि बहुत प्राचीन है। जिसकी छत्रछाया मे भारत ही नहीं नेपाल जैसे और भी कई देशो से संस्कृत का अध्ययन करने विद्वान आते है। उन्होने कहा अयोध्या मे संस्कृत महाविद्यालय इस देवभाषा के उत्थान मे सक्रिय है , परन्तु विश्वविद्यालय के बिना अधूरे थे। 
इसके साथ ही कहा कि वैदिक और संस्कृत विद्वानो से परिपूर्ण नगरी मे दर्जनो संस्कृत महाविद्यालय है। लेकिन उनको संरक्षण और पुष्ट करने मे विश्वविद्यालय की भूमिका को नजरंदाज नही किया जा सकता। सांसद लल्लू सिह के परिश्रम पर केन्द्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सराहनीय कदम उठाया जिसे प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मे संस्कृत विश्वविद्यालय को स्थापित करने की घोषणा करके शिक्षा और संस्कृत के हजारो शिक्षको का सम्मान बढाया है। 
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