JNU में एक बार फिर से कट्टरपंथ का बोलबाला.. साबरमती लाइब्रेरी में पढ़ी जा रही नमाज़, माहौल लग रहा मदरसे जैसा

एक बार फिर से वो शिक्षण संस्थान चर्चा में है जो शुमार किया जाता था भारत के सबसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों में.. आधुनिकता की तरफ ले जाने का बहाना बना कर वामपंथी विचारधारा का बोलबाला होने के बाद यहाँ पर कुछ ऐसे भी अवांछित तत्व निकल कर सामने आ गये जो आतंकियों की बरसी तक मनाने लगे और भारत के सबसे बड़े दुश्मन देश के समर्थन में नारे लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट और सरकार के खिलाफ शर्मिंदा हैं जैसे जहरीले बोल बोलने लगे .. यहाँ उन लोगों ने विरोध किया तो सिर्फ और सिर्फ हिन्दू और हिंदुत्व का..

उस शिक्षण संस्थान का नाम JNU है जिसका पूरा नाम जवाहर लाल युनिवर्सिटी है.. अभी कुछ समय पहले यहाँ पर सरकार ने कड़े तेवरों के साथ उन सभी अवांछित तत्वों का दमन करने का प्रयास किया था जो देश विरोधी हरकतों के लिए बदनाम हुए थे.. लेकिन ठीक उसी समय भारत विरोधी नारों के लिए पुलिस जांच का सामना कर रहे उन सभी को विपक्ष में कई बड़े नेताओं का साथ मिला जिस से उनके हौसले बढ़ गये और बाद में उन्होंने फिर से अपना सर उठाना शुरू कर दिया है जिसे शत प्रतिशत कट्टरपंथ ही कहा जाएगा .

अभी हाल में ही अरविन्द केजरीवाल के वकील ने जिस प्रकार से अदालत में कन्हैया का समर्थन किया उस से बढे हौसले अब सतह पर आते दिखाई दे रहे हैं . देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर एक साज़िश रची जा रही है और ये साज़िस है इस्लामी कट्टरपंथी को बढ़ाया देने की ..दरअसल ये साज़िस रची जा रही है जेएनयू के अंदर कथित रूप से कुख्यात टुकड़े-टुकड़े गैंग के तरफ़ से…..शिक्षा के मंदिर में देश भर से छात्र यहाँ शिक्षा हासिल करने आते है जिनके सपनों में बड़ा अधिकारी बनना या कुछ अन्य सकारत्मक मार्ग होता है ..

लेकिन अब इसी शिक्षा के मंदिर में पुस्तकालय के अंदर ही खुलेआम नमाज़ पढ़ी जा रही है ..वहां ये साबित किया जा रहा है कि उनका मत और उनकी विचारधारा ही सर्वोपरि है.. इस से अन्य धर्मो के छात्र छात्राओं को क्या असुविधा हो रही इसका किसी से कोई सरोकार नहीं .. JNU में होने वाली इस नमाज़ से परेशानी महसूस करने वाले अन्य छात्रों ने जब इस बात की जानकारी दी तो सुदर्शन न्यूज़ संवादाता गौरव मिश्रा सीधे ग्राउंड जीरो जेएनयू यूनिवर्सिटी कैम्पस पहुँचे.

यहाँ पर जब जमीनी पड़ताल की गई तो उसके बाद उन छात्रों ने उन्हें पूरी जानकारी जो दी वो किसी को भी हैरान कर देने वाली है और सोचने पर मजबूर करने वाली भी है कि या सच में ये एक सेकुलर देश है जैसा कि सत्ता और विपक्ष दोनों दावे के साथ कहते हैं . छात्रों ने बाकायदा वो दरी दिखाई जो नमाज के समय वहां के मुस्लिम छात्र पुस्तकालय में बिछाते हैं . जबकि ठीक उसी समय उसी जगह पर कई छात्र अपने कोर्स आदि की पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं जिन्हें वहां से हटा दिया जाता है .

वहां के छात्रो के अनुसार ये सब एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है जिसके पीछे का दिमाग वहां की बदनाम गैंग टुकड़े टुकड़े का है .. इन में से कुछ ने मजहबी किताबों का भी हवाला दिया है जिसमे जहां नमाज़ पढ़ी जाय वो जगह इस्लामिक होना भी कहा जा रहा है . वहां के कुछ छात्र तो अब ये भी मानने लगे हैं कि इनकी योजना इस साबरमती लायब्रेरी को मस्ज़िद या मदरसा बनाने की है जिसकी तरफ उनके द्वारा उठाया गया ये पहला कदम है ..

यहाँ पर JNU प्रशासन की लाचारगी भी दिखाई दे रही है क्योकि इसकी शिकायत कई बार JNU प्रशासन से हुई है जिस पर JNU प्रशासन ने  नोटिस बोर्ड पर साफ साफ एक लेटर इस बात के जानकरी के साथ चस्पा भी कर दिया कि ऐसा न किया जाय पर न तो नमाज़ी उसे मानने को तैयार हुए और न ही उनके समर्थक टुकड़े -टुकड़े गैंग. इस मामले में खुद को सेकुलर कहने वाले मीडिया वर्ग की ख़ामोशी से भी अधिकांश छात्र निराश हैं जो केवल और केवल हिन्दू विरोध की खबर को प्राथमिकता देना ही पत्रकारिता समझते हैं . JNU के पुस्तकालय में होने वाली इस नमाज़ से परेशान अन्य छात्रों ने इस खबर को प्राथमिकता से दिखाने के लिए सुदर्शन न्यूज का धन्यवाद किया है ..

 

रिपोर्ट –

गौरव मिश्र

सुदर्शन न्यूज संवाददाता- दिल्ली

 

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