करोड़ो हिन्दू प्रतीक्षा कर रहे थे 29 जनवरी को अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के मंदिर की सुनवाई का..लेकिन अब ये क्या ?

उस घड़ी का इंतज़ार करोड़ो हिन्दू टकटकी लगाए कर रहे थे लेकिन उनकी प्रतीक्षा व उनका धैर्य अभी और लंबा बढ़ेगा. उनके आराध्य और धर्म के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम इस धर्मनिरपेक्ष देश मे अभी और समय तंबू में ही रहेंगे..यही सुप्रीम कोर्ट है जिसने पिछले कुछ दिनों में धारा 377 और धारा 497 मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए अपने फैसले दे डाले थे लेकिन अब उसी सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से टल गई है भगवान श्रीराम मुद्दे की सुनवाई ..

अयोध्या की श्रीराम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में अब एक और नया मोड़ आया है. इस मामले पर 5 जजों की बेंच 29 जनवरी को जो सुनवाई करने वाली थी, वो फिर से टल गई है. जानकारी के मुताबिक पांच जजों की बेंच में शामिल एसए बोबड़े 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में मौजूद नहीं रहेंगे. जिस वजह से सुनवाई की तारीख को एक बार फिर बढ़ा दिया गया है. फिलहाल नई तारीख पर फैसला नहीं हुआ है.

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले को लेकर पांच जजों की बेंच का ऐलान किया था और इसकी सुनवाई 10 जनवरी को होनी थी. लेकिन सुनवाई से ठीक पहले ही जस्टिस यूयू ललित ने जजों की इस बेंच से अपना नाम वापस ले लिया. जिसके बाद इस सुनवाई को टालना पड़ा. पांज जजों की इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस SA बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एनवी रमाना शामिल थे. जिसके बाद इसकी सुनवाई 29 जनवरी तक के लिए टाल दी गई थी.

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर पहले भी कई हिंदूवादी संगठन कोर्ट की लेटलतीफी को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं. हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कोर्ट अगर उन्हें इस मामले को सौंपे तो वो 24 घंटे में इसे सुलझा लेंगे

इससे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने जजों की बेंच में दो नए नाम जोड़े थे. सीजेआई की तरफ से जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर को बेंच में शामिल किया गया. जिसके बाद इस केस की सुनवाई के लिए रास्ता खुला माना जा रहा था. सभी लोग 29 जनवरी के इंतजार मे थे.

योग गुरु बाबा रामदेव ने भी श्रीराम मंदिर को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और सरकार को श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए कदम उठाने चाहिए. मुझे कोर्ट की तरफ से जल्द फैसला होने की कम संभावना लग रही हैं, इसीलिए मुझे लगता है कि सरकार को इसके लिए कदम उठाना चाहिए.

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