आतंकियों और पत्थरबाजों से लड़ता 1 CRPF योद्धा बलिदान हुआ. 2 आतंकी भी मारे गये

भारत की सेना के शौर्य को ललकारते हुए २ आतंकियों ने गोलियां बरसाईं, राष्ट्र के सैनिको ने बिके जमीर और भीख के हथियार ले कर लड़ रहे इन आतंकियों की चुनौती स्वीकार कर ली और उन्हें घेर लिए एक इलाके में . उनकी मौत से सैनिक थोड़ी ही दूर थे कि अचानक ही तमाम तथाकथित मानवाधिकार वालों के पेट में दर्द शुरू हो गया और उन्होंने अपनी नजरें उधर घुमा ली . फिर थोड़ी देर बाद उसी तरफ तमाम पत्थरबाज दिखने लगे और सैनिको को दो मोर्चे पर लड़ने पर मजबूर होना पड़ा .

उन्मादी भीड़ और तमाम प्रकार के जेहादी नारों के साथ सेना के सैनिको को घेर कर हमला होने लगा . भयानक पत्थरबाजी और गोलीबारी के बीच फंसे सैनिको को ये भी देखना था कि उनकी गोली किसी पत्थरबाज को न लगे अन्यथा कथित मानवाधिकार वाले और स्वघोषित बुद्धिजीवी वर्ग उनकी नौकरी पर ऊँगली उठाने के साथ साथ उनकी जिन्दगी भी उत्तर प्रदेश की जेल में 4 साल से बंद सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की तरह तबाह कर देते .

ये घटना है कश्मीर के पुलवामा के त्राल इलाके की जहाँ पर अरिपाल क्षेत्र में सैनिको को २ आतंकी छिपे होने की सटीक सूचना मिली . सूचना के बाद इलाके को फ़ौज और CRPF ने घेर लिया . खुद को घिरा देख कर आतंकी गोलियां बरसाने लगे तो फ़ौज ने भी मोर्चा सम्भाला . फिर सैकड़ो की संख्या में पत्थरबाज निकल कर आ गये और उन्होंने हल्ला बोल दिया . सैनिको ने दोनों मोर्चो पर लड़ाई लड़ी लेकिन दो आतंकियों को मार कर आख़िरकार भारत की CRPF का एक सैनिक वीरगति पाया . सैनिक की वीरगति के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल बन गया और सभी ने पत्थारबजो को आतंकियों जैसी ही सजा देने की वकालत की है .

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