सबरीमाला मन्दिर धोने तक को अपराध घोषित करने के लिए दायर हुई याचिका

पहले जिद कर के मन्दिर की पुरानी परम्परा तोड़ी और उसके बाद वहां मौजूद हिन्दू भक्तों पर लाठियां बरसाईं . लेकिन इसके बाद भी जब मन नही भरा तो अब एक नई याचिका दाखिल कर डाली गयी . केवल और केवल इसलिए क्योकि मन्दिर के पुजारियों ने मन्दिर को गंगा जल से धो दिया .. आखिर अपने ही मन्दिर को गंगाजल से धोने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों ? क्या अब हिन्दुओ के हर सोच और विचार पर प्रतिबन्ध लगेगा ?

जहाँ इस मुद्दे पर पहले भारतीय जनता पार्टी खुल कर हिन्दू समाज की पीड़ा में शामिल हुई है और उसके नेता वी मुरलीधरन ने आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश पूरी तरह से सुनियोजित था जिसके तहत दो माओवादी महिलाओं को पुलिस की देख रेख में मंदिर के अंदर ले जाया गया। इतना ही नहीं , भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय मंत्री अनंत हेगड़े ने साफ़ साफ़ कहा है कि वामपंथी शासन का ये कुत्सित प्रयास हिन्दुओ की इज्जत लूटने जैसा है .. लेकिन वहीँ दूसरी तरफ एक अन्य लॉबी है जो आये दिन खड़ी कर रही है एक नया संकट हिन्दू समाज के आगे .

ध्यान देने योग्य है कि केरल में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बाद किए गए शुद्धिकरण के खिलाफ दायर की गई अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 22 जनवरी को सुनवाई करेगा. याचिका दायर करने वाले वकील पीवी दिनेश ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद मंदिर में बुधवार को किया गया शुद्धिकरण कोर्ट की अवमानना है. इस मामले में कोर्ट ने जल्द सुनवाई करने से इंकार कर दिया और कहा कि इस याचिका पर 22 जनवरी को ही सुनवाई होगी, उससे पहले नहीं होगी. ये याचिका सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने लगाईं है जिनका नाम P V दिनेश है और वामपंथी सोच वाले वकील कहे जाते हैं .

 

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