संसद में ओवैसी के अल्लाहू अकबर को वामपंथी विचारधारा ने घोषित किया सेक्यूलरिज्म… पर “जयश्रीराम” व “वन्देमातरम” पर दिखाई ये सोच

अक्सर देखा होगा कि कथित सेक्यूलरिज्म की आड़ में तमाम कथित बुद्धिजीवी लोग, वामपंथी डिजायनर पत्रकार व राजनेता कभी जयश्रीराम के उद्घोष को सांप्रदायिक बताते हैं तो कभी वन्देमातरम तथा भारतमाता की जय को इस्लाम के खिलाफ बोलते हुए खारिज कर देते हैं. जब भी कोई व्यक्ति जयश्रीराम, वंदेमातरम या भारतमाता की जय बोलने की बात करता है तो वामपंथी विचारधारा चीख उठती है तथा इसका विरोध करने लगती है.

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लेकिन ये वामपंथी विचारधारा, कथित बुद्धिजीवी तथा डिजायनर पत्रकार उस हर्षित हो उठे अक्सर सांप्रदायिक तथा जहरीली बयानबाजी करने वाले तेलंगाना की हैदराबाद लोकसभा सीट AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में अल्लाहू अकबर के नारे लगाये. जयश्रीराम को सांप्रदायिक बताने वालों, वन्देमातरम तथा भारतमाता की जय बोलने की खिलाफत करने वालों ओवैसी द्वारा संसद में बोले गये अल्लाहू अकबर को सेक्यूलरिज्म का प्रतीक मानते हुए चुप्पी साध ली.

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इससे पहले बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने शपथ के दौरान जयश्रीराम बोला तो विपक्ष चीख उठा था. तमाम बीजेपी सांसदों ने वन्देमातरम तथा जयश्रीराम बोला तो वामपंथी विचारधारा ने इसे सांप्रदायिक बताते हुए खिलाफत की. लेकिन जैसे ही ओवैसी ने सांसद पद की शपथ के दौरान अल्लाहू अकबर बोला, इस विचारधारा के लोगों के चेहरे चमक उठे तथा इसे एकतरह से सेक्यूलरिज्म का प्रतीक बताते हुए ओवैसी के साथ खड़े हो गये.

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