दिन रात सिर्फ मुसलमान – मुसलमान रटने वाला गद्दार ओवैसी मोदी को बोल रहा सिर्फ हिंदुओं का प्रधानमंत्री

ओवैसी सिर्फ और सिर्फ नफरत ही राजनीति चाहते हैं। ओवैसी अपना सवाल गुजरात की उन मुस्लिम महिलाओं से पूछे जो PM मोदी के पक्ष में खड़ी हैं। PM

मोदी सिर्फ हिंदुओं के प्रधानमंत्री हैं तो ओवैसी की ये सोच एक दम गलत हैं। विदित हो कि सत्ता को संभालते समय PM मोदी और सीएम योगी ने सबसे पहले

तीन तालाक के मुद्दे पर ही कड़ा फैसला लिया था। रही बात राम मंदिर की तो PM मोदी बाखुबी जानते है कि आयोध्या की जगह रामलला की हैं ओर रामलला

की ही रहेगी।

आपको बता दे कि एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पीएम से पूछा कि क्या वो सिर्फ

हिंदुओं के प्रधानमंत्री हैं। ओवैसी ने बीते दिन मोदी के गुजरात में दिए उस बयान का जिक्र भी किया जिसमें वो जनता से पूछ रहे हैं कि वो मंदिर चाहते हैं या

मस्जिद। औवेसी ने पीएम के इस बयान पर कहा कि ये बयान चौंकाने वाला है क्या पीएम एक विशेष समुदाय के हैं, या फिर देश के प्रधानमंत्री हैं।

ओवैसी ने कहा

कि संविधान की शपथ लेने वाला प्रधानमंत्री सिर्फ मंदिर की बात कर रहा है, वह गंगा-जमुनी तहजीब की बात नहीं करता, जहां एक साथ मंदिर, मस्जिद, चर्च हों

पीएम सिर्फ पूछ रहे हैं कि तुम्हें मंदिर चाहिए या मस्जिद।

 साथ ही सांसद ओवैसी ने कहा कि पीएम मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं या हिदुत्व के। उन्होंने कहा कि गुजरात चुनाव के लिए ऐसे विभाजनकारी बयान पीएम को

शोभा नहीं देते। पीएम मोदी ने राम मंदिर मुद्दे पर कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा था, कि ‘कांग्रेस तय कर ले कि वो मंदिर चाहती है या मस्जिद।

पीएम मोदी

गुजरात चुनाव में कई बार सुप्रीम कोर्ट में चल रहे राम मंदिर का मुद्दा उठा चुके हैं। इस रैली में उन्होंने कांग्रेस के नेता और वकील कपिल सिब्बल के बहाने कांग्रेस

को निशाने पर लिया था। औवेसी कहा, कि ‘जब कांग्रेस पार्टी के नेता मोदी को अपशब्द कहते हैं
तो उन्हें दुख होता है,लेकिन जब राजस्थान में अफराजुल की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है तो प्रधानमंत्री उसकी आलोचना नहीं करते।

ओवैसी ने कहा कि उनका

बयान यह दिखाता है कि बीजेपी सरकार अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले हमलों को खारिज नहीं करना चाहती। असल में ये लोग अल्पसंख्यक विरोधी सोच वाले

लोगों का विरोध करना ही नहीं चाहते।’ ओवैसी ने कहा, कि ‘जिस तरह कुल्हाड़ी और तलवार से अफराजुल की हत्या की गई, वह शरीर पर हमला नहीं बल्कि

संविधान पर हमला था। हत्यारा अफराजुल को नहीं देश को जला रहा था।

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