नकली खबरिया संस्थानों को उपराष्ट्रपति महोदय ने दी नेक सलाह…

एम वेंकैया नायडू ने कहा कि वह उस आजादी को याद करते हैं जब वह उपराष्ट्रपति नहीं हुआ करते थे तथा आसानी से लोगों से मिला-जुला करते थे। साथ ही वह किसी प्रोटोकॉल से बंधे नहीं थे। दिल्ली अखबार लोकमत के दिल्ली संस्करण को लॉन्च करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में उपाध्यक्ष ने कहा कि जीवन के बिना किसी भी तरह की बातचीत “पत्नी के बिना जीवन” जैसी है।

साथ ही नायडू ने कहा कि उन्हें किसी आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान दोस्तों से मिलने के बहुत कम ही अवसर मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि चूंकि आप पद के प्रोटोकाल से बंधे होते हैं। उन्होंने कहा, ”मुलाकात, दुआ-सलाम के बगैर जीवन कहां हैं? अगर आप लोगों से मिलते नहीं हैं, दुआ-सलाम नहीं करते हैं तो ऐसा लगता है कि आप बिना पत्नी के जिंदगी जी रहे हैं।” उनके इतना कहते ही पूरे हॉल ठहाकों की गूंज से भर गया। नायडू ने कहा, ”मैं क्या कर सकता हूं? मुझे नहीं मालूम। मैं समझने का प्रयास कर रहा हूं।”
आगे श्री नायडू ने कहा कि ‘पेड न्यूज’ एक बुराई बन गई है।

उन्होंने अखबारों से अपनी ताकत का उपयोग समाज के भले के लिए बुद्धिमत्तापूर्वक करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अखबारों के पास समाज को प्रभावित करने की ताकत है जिसका इस्तेमाल लोगों के व्यापक हित के लिए उसे बुद्धमतापूर्वक करना चाहिए।
मातृभाषा के उपयोग की जोरदार पैरवी करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आंध्रप्रदेश के एक विद्यालय में पढ़ने के बावजूद वह वर्तमान हैसियत तक पहुंचे, जहां पढ़ाई का माध्यम तेलुगू था, उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों पर अंग्रेजी में बोलने का दबाव डालते हैं जो उनकी कमजोरी दर्शाता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भाषा के खिलाफ नहीं हैं।

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