भारत के मुस्लिम संगठन का आपसी विवाद सुलझाने के लिए पाकिस्तान से आ रहे उलेमा… ये कैसी धर्मनिरपेक्षता ?


इस्लामिक संगठन “तन्लीगी जमात” में काफी लंबे समय से आपसी विवाद चल रहा है. वही तब्लीगी जमात जो देश की सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर रही है, जिसने पिछले महीने बुलंदशहर में इज्तेमा का आयोजन कराया था तथा जिस तब्लीगी जमात की हकीकत को सुदर्शन ने देश के सामने रखा था. आश्चर्य इस बात का नहीं है कि तब्लीगी जमात के नेताओं में विवाद बढ़ गया है, बल्कि आश्चर्य तो इस बात का है कि तब्लीगी जमात के आपसी विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तान तथा बांग्लादेशी उलेमा भारत आ रहे हैं.

आपको बता दें कि तब्लीगी जमात को लेकर देश में चल रहे विवाद की गूंज दूसरे मुल्कों तक पहुंच गई है तथा इसे सुलझाने के लिए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश के प्रमुख उलमा आज  23 जनवरी को भारत पहुंचेंगे. दरअसल दो गुटों में बंटे हजरत निजामुद्दीन में स्थित तब्लीगी जमात के मरकज और इसके अमीर मौलाना साद कांधलवी को लेकर चल रहे विवाद काफी बढ़ गया है. लेकिन यहाँ सवाल खड़ा होता है कि भारत में कोई ऐसा इस्लामिक विद्वान नहीं है जो तब्लीगी जमात के विवाद को सुझा सके, जो  इसके   लिए पाकिस्तान तथा बंगलादेश से उलेमाओं को बुलाया जा रहा है. मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक, बंगलादेश तथा पाकिस्तान के प्रमुख उलेमा आज भारत पहुंचेंगे तथा दारुल उलूम देवबंद और दिल्ली में जमात के मरकज में पहुंचकर उलमा से वार्ता करेंगे. विदेशी उलमा के भारत आने की पुष्टि दारुल उलूम के एक पदाधिकारी ने की है.

बता दें कि तब्लीगी जमात के मरकज और इसके अमीर मौलाना साद कांधलवी को लेकर देश के अंदर पिछले करीब छह वर्षों से विवाद चल रहा है. 18 मार्च 2014 को तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना जुबैर के इंतकाल के बाद इस विवाद की शुरुआत हो गई थी, क्योंकि मौलाना साद ने बिना मैनेजमेंट की अनुमति खुद को जमात का अमीर घोषित कर दिया था. इसको लेकर पूरे देश के अंदर जमात के दो गुट बने हुए हैं. इसको बढ़ावा उस समय मिला जब मौलाना साद कांधलवी पर आरोप लगे कि वह आयोजित होने वाले इजतमा में दीन इस्लाम की गलत व्याख्या कर रहे हैं.

इसको लेकर दारुल उलूम में लोग शिकायतें लेकर पहुंचने लगे. जिसके चलते दारुल उलूम की ओर से मौलाना साद को समझाने का प्रयास भी किया गया. बाद में दारुल उलूम ने बयान जारी कर कहा था कि मौलाना साद भरोसे के लायक नहीं है. इतना ही नहीं पिछले दिनों दारुल उलूम ने एक अन्य बयान जारी कर तब्लीगी जमात के दोनों गुटों से किसी भी प्रकार का ताल्लुक होने से इंकार करते हुए संस्था के भीतर जमात की गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी थी जबकि हाल ही में देवबंद ने छात्रों को निर्देश दिया था कि वह तब्लीगी जमात के किसी कार्यक्रम में शामिल न हों.


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