राजीव गांधी की मौत के बाद भी उनके पीछे पड़ी है बोफोर्स. फिर शुरू हो सकती है जांच

दिल्ली उच्च न्यायालय में शुक्रवार को जिसमें बोफोर्स मामले में कार्यवाही निरस्त कर दी गई थी उसमें सीबीआई से एक संसदीय समिति के ज्यादातर सदस्यों ने 2005 के उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाने को कहा। यह जानकारी समिति के दो सांसदों ने दी, जिसकी वजह से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को उपसमिति के सदस्यों के लोक-लेखा समिति से संबद्ध रक्षा मामलों के सवालों का सामना करना पड़ा।
उन्होंन कहा कि आखिर उस समय शीर्ष अदालत में सीबीआई ने गुहार क्यों नहीं लगाई थी जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने कार्यवाही को 2005 में निरस्त कर दी थी। क्या बरसों से बंद पड़ा बोफोर्स का जिन्न एक बार फिर बाहर निकलेगा। कल सीबीआई डायरेक्टर पीएसी की उपसमिति के सामने पेश हुए और सीबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय को दोबारा बोफोर्स मामले में कार्यवाही जो 2005 में निरस्त कर दी गई थी उसको दोवारा खोलने को कहा है। जिसके वजह से उसकी अगुवाई भतृहरि माहताब कर रहे है। 
इसमें पहले सीबीआई ने संसदीय समिति से कहा की अब हम हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे रहे है। जब वह सरकार की हरी झंडी का इंतज़ार कर रहे थे हाईकोर्ट ने 2005 में बोफोर्स केस को खारिज़ कर दिया था। दरअसल, ये समिति बोफोर्स मामले में सीएजी रिपोर्ट के कुछ कागजों की जांच कर रही है जिससे अब संसदीय समिति ने सरकार से हरी झंडी लेकर केस दोबारा खोलने को इजाजत ले ली है। इसमें समिति ने सीबीआई को दो हफ्ते का समय दिया है।
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