वो तीन तलाक मुद्दे पर दिखा करती थी अदालत में, अब चाहती है श्रीराम के मंदिर मुद्दे पर भी कुछ बोलना…. जानिए कौन है वो

उत्तर प्रदेश में एक मुस्लिम वकील ने अपने को राम मंदिर के पक्षकार बनने की याचिका कोर्ट में दायर की और इससे लगता है कि अयोध्या में राम मंदिर बनने के पक्ष में ये मुस्लिम समुदायों की इच्छा सामने आयी है। इस वकील ने पहले भी तीन तलाक को अवैध माना था और अपने को इस्लाम की अच्छी समझ रखने के आधार पर कोर्ट में पक्षकार की याचिका दायर की।

बता दें कि तीन तलाक मामले में याचिकाकर्ता वक़ील फराह फ़ैज़ ने अयोध्या राम मंदिर विवाद में भी अब नया पक्षकार बनने की अर्ज़ी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है.

फराह ने खुद को सुन्नी परिवार में जन्म लेने और हाफिज पिता की पुत्री होने के साथ इस्लाम की अच्छी समझ होने को भी अपने दावे के आधार बनाया है। इससे लगता है कि कुछ लोग जानते राम लला मंदिर के ऐतिहासिक सच क्या है ? और उन्हें पता है कि अयोध्या में ही राम मंदिर बनना चाहिए। वही कुछ लोग राम मंदिर बनने का विरोध कर रहे है शायद उन्हें हिन्दू संस्कृति के इतिहास का ज्ञान नहीं है। इसलिए वे विरोध कर रहे है। अस्तित्व का अंश भी एक अस्तित्व ही होता है।

गौरतलब है कि 14 पेज की अपनी अर्ज़ी में फराह ने मस्जिद कहां और कैदी ज़मीन पर बने इन तमाम नुक्तों पर इस्लाम की व्यवस्था और नियम बताए हैं. साथ ही ये भी बताया है कि आखिर किन किन आधार पर सुन्नी मुस्लिमों का विवादित स्थल पर दावा इस्लाम के सिद्धांतों के मुताबिक नाजायज़ है। अयोध्या विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने 13 पक्षकारों वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट पिछले मंगलवार से सुनवाई कर रहा है.

फराह का दावा इस सिलसिले में 14 वां है. अब ये तो कोर्ट पर निर्भर है की वो फराह की याचिका पर क्या रुख अख्तियार करता है. लेकिन तीन तलाक को अवैध घोषित करने में अपनी भूमिका निभाने वाली फराह एकबार फिर मुसलमानों से जुड़े इस अहम मसले में भी कूद पड़ीं हैं। राम मंदिर के सच को जानकर इस वकील ने कोर्ट में राम मंदिर के बनने पक्षकार की यचिका दर्ज की और अभी याचिका पर कोर्ट की सुनवाई बाकी है। यहाँ देखने की बात है कि वकील सुन्नी समुदाय का है एक तरफ सुन्नी समुदाय राम मंदिर बनने का विरोध कर रहा है। वही दूसरी ओर ये वकील राम मंदिर का प्रहरी बनकर खड़ा है। 

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