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‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने युवाओं को दिए सुझाव, कहा- जीवन के दायरे से निकलने का करें प्रयास

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 31वीं बार मन की बात के जरिए देश को संबोधित किया। मन की बात में संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने युवाओं से अपने कंफर्ट जोन को छोड़ने के लिए कहा। पीएम ने कहा कि गर्मी की छुट्टियों में युवाओं को भीड़भाड़ ट्रेन में सफर करना चाहिए, जिससे एक नया अनुभव होगा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने बच्चों को गरीब बच्चों के साथ खेलने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि युवाओं की तकनीक से दूर जाकर हुनर का विकास करें, क्योंकि तकनीक हमें अपनों से दूर लेकर जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं को ट्रेवलिंग, स्विमिंग, कैपिंग जैसे अनुभव लेने चाहिए। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में वीआईपी कल्चर के खिलाफ गुस्सा है। सरकार ने लालबत्ती हटाने का फैसला किया है। अब इसे प्रयोग करने वाले लोग गाड़ी से ही नहीं बल्कि मन से भी लालबत्ती का लोभ हटाएं।

पीएम ने कहा कि न्यू इंडिया में अब VIP की जगह EPI (Every Person is Important) का जोर रहेगा। जलवायु परिवर्तन को बड़ी समस्या बताते हुए प्रधानमंत्री ने सामूहिक रूप से प्रकृति और पंछियों को बचाने की अपील की। बोहरा समुदाय के धर्म गुरु का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें भी पंछियों को बचाने के लिए प्रयास करना चाहिए।

पीएम ने कहा कि 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में भी बनाया जाता है। बाबा साहेब आंबेडकर को याद करते हुए पीएम ने कहा कि श्रमिकों के कल्याण के लिए उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। जगत गुरु बश्वेश्वर ने भी श्रम श्रमिक पर गहन विचार रखे थे। उन्होंने कहा था कि अपने घर पर परिश्रम से भगवान प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा था कि श्रम ही ईश्वर है।

बुद्ध पूर्णिमा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक है। बुद्ध पूर्णिमा पूरी दुनिया में महत्वपूर्ण है। मैं श्रीलंका में एक कार्यक्रम में शामिल होने जाऊंगा। दुनिया में शास्त्रों की जो होड़ और अशांति है उसमें बुद्ध प्रासंगिक है। इसके साथ ही पीएम ने महाराष्ट्र और गुजरात को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि देश को 2022 तक आगे लेकर जाना है। पांच मई को दक्षिण एशिया सैटेलाइट लॉन्च होगी। इससे बहुत फ़ायदा मिलेगा। यह भारत की ओर से दक्षिण एशियाई देशों को बड़ा नजराना है।

पीएम ने कहा कि युवाओं को कुछ नया सीखना चाहिए। वैकेशन में कुछ नया करें। जीवन में कुछ बनने का सपना अच्छी बात है, लेकिन अपने भीतर के इंसान को कुंठित न होने दें। मानवीय गुणों से दूर तो नहीं हो रहे हैं। तकनीक सीखें, संगीत सीखें, अन्य भाषाएं सीखें। भारत में तमाम विविधताएं हैं। स्वीमिंग नहीं आती तो सीखें, ड्राइंग सीखें, कुछ लाभ तो मिलेगा। नया कुछ भी करें।

उन्होंने कहा कि बिना पैसे लिए ऐसे लोगों को सिखाएं जो आपने सीखा है। टेक्नॉलजी दूरियां कम करने के लिए आईं, लेकिन इससे घरवालों से ही दूरियां बढ़ गईं। आज प्रतिस्पर्धा का युग है। छुट्टियों में भी कोचिंग क्लास होने लगते हैं। जीवन के सपने होना अच्छी बात है, लेकिन यह भी देखिए कि कहीं हम मानवीय गुणों से दूर तो नहीं हो रहे हैं। टेक्नॉनजी से थोड़ा दूर होकर नई भाषा सीखें, कोई वाद्य यंत्र सीखें।

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