‘मन की बात’ के इस खास संस्करण में पीएम मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों को किया याद, दिए कुछ खास मंत्र

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 32वीं बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज वीर सावरकर जी का जन्मदिन है। उन्होंने माझी जन्मठेप सेलुलर जेल में लिखी। आज़ादी के दीवानों ने कैसी कैसी यातनाएँ झेली होंगी वहां। सबको वहां जाकर देखना चाहिए।  मैं बहुत खुश हूं कि हमारी युवा पीढ़ी देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्रामों के बारे में रुचि ले रही है।

इसके साथ ही पीएम ने आने वाले 5 जून को पर्यावरण दिवस पर विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी दी। पीएम मोदी ने कहा कि 21 जून को विश्व योग दिवस पूरी दुनिया मनाती है, यह लोगों को जोड़ रहा है। तनाव मुक्त जीवन के लिए योग जरूरी है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को रमजान की मुबारकबाद दी और कहा कि हम गर्व कर सकते हैं कि भारत में सभी धर्म संप्रदाय के लोग एक साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि हर प्रकार की विचारधारा, हर प्रकार की पूजा पद्धति, हर प्रकार की परंपरा, हम लोगों ने एक साथ जीने की कला आत्मसात की है।

पीएम मोदी के ‘मन की बात’ की कुछ मुख्य बातें-

वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण के काम को बढ़ावा दें, योगदान दें।

तीन पीढ़ी के लोग योग करते हुए अपनी तस्वीर मुझे भेजें।

योग के प्रति लोगों को जागरूक बनाने में अपना योगदान दें।

योग दुनिया को भारत की बहुत बड़ी देन है।

ये मेरे लिए बहुत ख़ुशी कि बात है कि मेरी यात्रा को भी स्वच्छता से जोड़ दिया गया है।

तन, मन, शरीर, विचार और आचार से स्वस्थता की अंतर्यात्रा का अनुभव योग के माध्यम से संभव है।

स्वच्छता की ओर हर बार नए कदम उठाना है तभी गांधी जी का सपना पूरा हो सकता है।

जो कूड़ा-कचरा है, इसको हम व्यर्थ न मानें, वो वेल्थ है, एक रिसोर्स है। इसे सिर्फ गार्बेज के रूप में न देखें।

हम तरल कचरे और सूखे कचरे की भिन्नता को जानें और दोनों के लिए अलग अलग कूड़ेदान का उपयोग करें।

जम्मू-कश्मीर का ‘रियासी ब्लॉक खुले में शौच से मुक्त हुआ है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर देश के करीब 4000 नगरों में कचरा एकत्र करने के साधन उपलब्ध होने वाले हैं।

मैं उन सभी का धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारे सरकार के 3 सालों के कार्यों की विवेचना की।

तीन साल के काम को हर कसौटी पर परखा गया। कई सर्वे हुए, कमियां पता चलने पर सुधार की संभावना होती है।

लोक​तंत्र में सरकारों को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।

5 जून का प्रकृति के साथ जुड़ने का वैश्विक अभियान, हमारा स्वयं का भी अभियान बनना चाहिए।

प्रकृति के प्रति प्रेम एक सहज समाज का हिस्सा है।

मैं युवा पीढ़ी को कहूंगा कि आजादी के लिए लोगों ने कैसी यातना झेली थी, सेलुलर जेल जार देखें।

छात्रों ने गर्मी की छुट्टियों में कुछ नया सीखने की कोशिश की है।

स्वतंत्रता सेनानियों की लेखनी ने भी आजादी को बल दिया।

अब मैं विदा लेता हूं। अगली बार जब मिलेंगे तो बारिश शुरू हो चुकी होगी, परीक्षाएं खत्म हो चुकी होंगी और मिट्टी की सुगंध चारों ओर फैली होगी।

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