अग्निवेश को बताया नक्सल चेहरा… एक बड़े वर्ग ने कहा- हां, सही बोला

झारखण्ड के पाकुड़ में हिन्दू कार्यकर्ताओं द्वारा पीटे गए स्वामी नाम किये हुए अग्निवेश के खिलाफ राष्ट्रवादी संगठनों, कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है. इसी बीच कहा जा रहा है कि अग्निवेश कोई स्वामी नहीं है बल्कि वह नक्सल समर्थक है, नक्सलवाद का एक ऐसा नया चेहरा है जो बेहद शातिर तरीकों से राष्ट्रविरोधी कारनामों को अंजाम देता है. अग्निवेश को नक्सली बताये जाने का देश के एक बड़े वर्ग ने समर्थन किया है तथा कहा है कि अग्निवेश कोई स्वामी नहीं बल्कि देशविरोधी तत्त्व है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक व हिन्दू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. सुमन कुमार ने पाकुड़ में स्वामी अग्निवेश के सार्वजनिक कार्यक्रम पर गहरी आपत्ति जताई है. बिना शासन-प्रशासन को सूचित किए गोपनीय तरीके से अग्निवेश के कार्यक्रम पर संघ प्रचारक ने सवाल उठाया है.

सुमन कुमार ने कहा कि स्वामी अग्निवेश का झारखंड आना कोई सामान्य घटना नहीं है. शात व स्थिर झारखंड में अलगववाद को हवा देने और शहरी नक्सली आदोलन को धार देने के लिए अग्निवेश को साजिशन बुलाया गया था. एक साजिश के तहत पाकुड़ को चयनित करके पत्थलगड़ी आदोलन को संथाल में जमीन तलाशने की कोशिश थी. अग्निवेश पूरी तरह नास्तिक, धर्म विरोधी, हिन्दू विरोधी व नक्सल समर्थक कम्युनिस्ट हैं। कौम व धर्म का अनिष्ट करने वाला ही कम्युनिस्ट होता है. और, ये बताने की जरूरत नहीं कि इस देश में कम्युनिस्टों का मूल एजेंडा क्या रहा है. ¨हदू विरोधी व देश विरोधी चेहरा रह-रह कर कम्युनिस्ट लोग दिखाते रहे हैं. 2011 में छत्तीसगढ़ सरकार ने खुफिया विभाग को अग्निवेश की गतिविधियों पर निगरानी रखने का आदेश दिया था। दंतेवाड़ा में नक्सलियों से गुपचुप मिलना, भारतीय सेना के खिलाफ भड़काऊ बयान देना और नक्सलियों का हौसला बढ़ाना आदि से अग्निवेश का मुख्य कथित सामाजिक जीवन भरा पड़ा है. एक सीडी 2011 में सामने आई थी जिसमें अग्निवेश लाल सलाम के नारे और भारतीय सेना वापस जाओ के जुमले उछाल रहे थे. डॉ. सुमन ने कहा कि इनका पूरी गतिविधि ही साधु के वेश में पाखंडी की है जो भारत विरोधी रही है. देश के रीति-रिवाज, धर्म-संस्कार व यहा की जीवन शैली की निंदा इनकी पुरानी आदत रही है.

अग्निवेश के किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम का खुला विरोध हर स्तर होना चाहिए। झारखंड में कुंद पड़ रहे पत्थलगड़ी आदोलन के अग्निवेश समर्थक रहे हैं. राज्य को अस्थिर करने और पृथकतावादी ताकतों को बढ़ावा देने के लिए अग्निवेश को बुलाया गया था. शात झारखंड को अस्थिर करने के किसी भी षड़यंत्र को झारखंड का समाज कभी सफल नहीं होने देगा. छत्तीसगढ़ में भी शहरी नक्सलियों को खाद-पानी देने का कार्य अग्निवेश करते रहे हैं, लेकिन झारखंड में उनके मंसूबे को कभी जमीन नहीं मिलेगी. राज्य सरकार अग्निवेश के कार्यक्रमों को भविष्य में न होने दे, ये सुनिश्चित होना चाहिए क्योंकि अग्निवेश नक्सलियों के साथ मिलकर आदिवासियों को राष्ट्र के खिलाफ भड़काते हैं.


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