क्या श्रीराम भक्तों का आक्रोश भांप गयी कांग्रेस? कपिल सिब्बल, जो लड़ रहे हैं बाबरी का मुकदमा, उन्हें मिला कुछ आदेश

अमर हुतात्मा वीर सावरकर ने एक बार कहा था कि अगर हिन्दू समाज संगठित हो जाये, हिन्दू समाज अपनी सभ्यता, अपनी संस्कृति के खिलाफ होने वाले किसी भी षड्यंत्र या साजिश के खिलाफ संगठित होकर अपनी आवाज उठाये तो देश का बड़े से बड़ा हिन्दू विरोधी राजनेता भी अपने कोट के ऊपर जनेऊ पहिनेगा, माथे पर तिलक लगाएगा और पूरी ताकत से स्वयं को हिन्दू हितैषी साबित करने की कोशिश करेगा. और आज के राजनैतिक परिद्रश्य में वीर सावरकर की ये बात सच साबित हो रही है जब हिन्दुत्व के विरोध की प्रतीक रहीं राजनैतिक पार्टियां भी खुद को हिन्दू हितैषी बताने का प्रयास कर रही हैं. चुनावी प्रचार के दौरान जिन्हें सिर्फ मस्जिद या दरगाह दिखाई देते थे, हिन्दुओं की संगठित शक्ति के कारण उन्हें अब मंदिर याद आ रहे हैं.

अब कांग्रेस पार्टी ने कपिल सिब्बल से बाबरी मस्जिद केस से अलग होने का आदेश दिया है. गौरतलब है कि कपिल सिब्बल वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं तथा अयोध्या श्रीराममंदिर निर्माण विवाद में बाबरी मस्जिद के पक्ष में केस लड़ रहे हैं. खबर के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने कपिल सिब्बल को कहा है कि वह खुद को इस केस से अलग कर लें. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस पार्टी ने सिब्बल से कहा गया कि इस केस से हाथ अपने खींचना ही राजनीतिक रूप से उनके लिए समझदारी भरा कदम होगा. कांग्रेस पार्टी ने सिब्बल को हिदायत दी है कि अगर कान्ग्रेस पार्टी को पुनः देश की राजनीति की मुख्य लड़ाई में लाना है तो कपिल सिब्बल को बाबरी मस्जिद केस से दूर हो जाना चाहिए ताकि देश के हिन्दू समाज के मन से ये भ्रम दूर हो कि कांग्रेस अयोध्या में श्रीराम मंदिर के खिलाफ है.

कपिल सिब्बल को कांग्रेस पार्टी के इस फरमान के बाद स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी श्रीराम भक्तों के आक्रोश को भांप गयी है, हिन्दुओं की संगठित शक्ति से डर गयी है. कांग्रेस को अंदाजा हो गया है कि अब हिन्दुओं की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ कांग्रेस के अस्तित्व को देश से सदा के लिए मिटा देगा. ये वही कांग्रेस है जिसने प्रभु श्रीराम को काल्पनिक बताया था. श्रीराम सेतु को काल्पनिक बताया. ये वही कांग्रेस है जो शुरू से ही श्रीराम मंदिर की खिलाफत करती आये है, मुस्लिम तुष्टीकरण में अंधी होकर हिन्दू आस्थाओं का गला घोंटती आयी हैं हिन्दुओं का दमन करती आयी है लेकिन अब वही कांग्रेस कपिल सिब्बल से कह रही है कि वह श्रीराम मंदिर के खिलाफ केस न लड़े. अब देखना ये है कि क्या कपिल सिब्बल इस केस से अलग होते हैं या नहीं और क्या श्रीरामभक्त और हिन्दू समाज कांग्रेस पार्टी की इस नई राजनैतिक पैंतरेबाजी में फंसकर कांग्रेस का समर्थन करेगा या फिर आगे भी कांग्रेस हिन्दुओं के आक्रोश का शिकार होती रहेगी व प्रधानमंत्री मोदी जी का “कांग्रेस मुक्त भारत” का सपना सकर होगा.

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