कांग्रेस के दो नेता तैयार बैठे थे उस साजिश में साथ देने के लिए जिसके बाद देश में आ जाता भूचाल

भीमा कोरेगांव हिंसा के बहाने देश में कत्लेआम, खून खराबा तथा प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ह्त्या करने की साजिश रचने के आरोप में पिछले दिनों जब पांच वामपंथी जानकारों (शहरी नक्सली) को गिरफ्तार किया गया तो देश की राजनीति में भूचाल आ गया. कम्यूनिस्ट तथा जातिगत जहर बोने तथाकथित दलित नेता तो छोडिये कांग्रेस पार्टी की इन शहरी नक्सलियों की गिरफ्तारी पर चीख उठी. देश के गद्दारों की गिरफ्तारी पर कांग्रेस सहित तमाम राजनैतिक दलों की चीख सुन देश की एक बार को सन्न रह गया कि आखिर गद्दारों की गिरफ्तारी पर ये रुदन क्यों हो रहा है ? लेकिन अब इस मामले में एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जो इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि आखिर अर्बन नक्सल लोगों की गिरफ्तारी पर कांग्रेस क्यों चीख रही थी.

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रतिबंधित संगठन सीपीआई(एम) में अर्बन लीडरशिप के सीनियर कॉमरेड्स नवंबर 2017 से मई 2018 तक कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं के साथ लगातार संपर्क में थे. उन्होंने अपने प्रोपोगंडा में कानूनी और आर्थिक मदद पाने के लिए कांग्रेस के 2 नेताओं के साथ दिसंबर 2017 और जनवरी 2018 में कई मीटिंग भी की थी. ये मीटिंग मुंबई और दिल्ली में हुईं थीं. सूत्रों का दावा है कि इस मामले में पुणे पुलिस द्वारा जून 2018 में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की फोन कॉल डिटेल की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि सीनियर कॉमरेड्स और इन दो कांग्रेसी नेताओं के बीच दर्जनों बार फोन पर भी बातचीत हुई है. इनमें से कुछ फोन कॉल की बातचीत थोड़ी लंबी भी पाई गई है. पुलिस को शक है कि कई बार इन नेताओं ने कॉन्फिडेंशियल बातचीत के लिए खुद के मोबाइल फोन के बजाए दूसरे मोबाइल नंबर का भी इस्तेमाल किया हो सकता है. हालांकि पुलिस इस मामले में इन 2 कांग्रेसी नेताओं के नाम का खुलासा फिलहाल नहीं कर रही है और इस मसले पर चुप्पी साधे बैठी है. पुलिस का कहना है कि हाउस अरेस्ट किए गए पांचों आरोपियों की पुलिस कस्टडी मिलने के बाद ही जरूरत पड़ने पर इंवेस्टिगेशन के लिए इन कांग्रेसी नेताओं को पूछताछ के लिए समन जारी किया जा सकता है.

ज्ञात हो कि इससे पहले जानकारी आयी थी कि कैसे गिरफ्तार किए गए संदिग्ध माओवादियों के पास से बरामद एक चिट्ठी ने यह खुलासा किया था कि वह कैसे अपने मंसूबों को अंजाम देने के लिए राजनैतिक मदद इकट्ठा कर रहे थे. चिट्ठी में इस बात का जिक्र किया गया था कि “प्रतिबंधित संगठन सीपीआई(एम) में अर्बन लीडरशिप के सीनियर कॉमरेड ने कांग्रेस पार्टी में अपने दोस्तों से दलित आंदोलन को उग्र करने के लिए आर्थिक और कानूनी मदद के लिए बातचीत की है और कांग्रेस पार्टी में उनके यह दोस्त उन्हें यह मदद मुहैया करवाने के लिए तैयार भी हैं.” जिस तरह से पुलिसिया जांच में अर्बन नक्सलियों के साथ कांग्रेसी नेताओं की संलिप्तता सामने आ रही है वो इस बात की ओर साफ़ संकेत करता है कि शायद सत्ता जाने के बाद कांग्रेस विपक्ष में खुद को स्वीकार नहीं कर पा रही है तथा इसके लिए गद्दारों के समर्थन में खड़ी हो रही है. खैर पूरी जानकारी अभी आना बाकी है.

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