प्रभु श्रीराम का जन्म कहाँ हुआ था ये भले 26 साल से अदालत में लम्बित है लेकिन करुणानिधि कहाँ दफनाये जायेंगे ये फैसला बस थोड़ी देर में

करुणानिधि अब नहीं रहे . उनके लिए तमिलनाडु के तमाम लोग काफी दुखी हैं और कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए पुलिस ने चाक चौबंद व्यवस्था कर रखी है .. लम्बी बीमारी के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली है . प्रभु श्री राम के खिलाफ बेहद ही अशोभनीय बयान देने के बाद उन्होंने तमिलनाडु के बाद पूरे देश में अपना नाम फैला लिया था , भले ही वो किसी भी रूप में . यद्दपि उनका खुद का नाम करुणानिधि ही भगवान् विष्णु के प्रतीक के रूप में माना जाता रहा है . यद्दपि भगवान श्री राम खुद दया और करुणा के सागर माने जाते हैं .. 26 साल से भी ज्यादा समय उनकी जन्मस्थली के विवाद में बीत गया और आगे भी न जाने कितना समय लगे जिस प्रकार से अदालतों से २०१९ के बाद फैसले देने की अपीलें की जा रही हैं .. लेकिन वहीँ करुणानिधि कहाँ दफनाये जायेंगे वो अभी थोड़ी देर बाद फैसला हो जाएगा .. 

ध्यान देने योग्य है कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्‍यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि के निधन के बाद उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब एआईएडीएमके सरकार ने एम करुणानिधि के अंतिम संस्कार लिए मरीना बीच पर जगह देने से इनकार कर दिया. मामला देर रात कोर्ट तक पहुंचा. मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार (08 अगस्त) सुबह 8 बजे से इस मामले पर सुनवाई शुरू कर दी है. तमिलनाडु सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. सरकार का कहना है कि मरीना बीच पर जगह नहीं है. तमिलनाडु सरकार ने अपने हलफनामे ने कहा कि मरीना बीच पर अंतिम संस्कार को सिर्फ मौजूदा मुख्यमंत्रियों को ही मरीना बीच पर अंतिम संस्कार के लिए जगह दी गई है. सरकार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों का अंतिम संस्कार गांधी मंडपम में किया गया है, क्योंकि करुणानिधि मौजूदा मुख्यमंत्री नहीं हैं, इसलिए उनका अंतिम संस्कार भी गांधी मंडपम में किया जाना चाहिए.

द्रविड़ आंदोलन के नायकों में शुमार एम करुणानिधि को उनकी पार्टी द्रमुक (डीएमके) चेन्‍नई के मरीना बीच पर दफनाने के लिए अड़ गई है. राज्‍य सरकार ने उनको यहां स्‍पेस देने से इस आधार पर इनकार कर दिया कि यदि मुख्‍यमंत्री के पद पर रहते हुए उनका निधन होता तो यहां अंतिम संस्‍कार होता. दूसरी वजह मरीना बीच के पर्यावरण की भी है. जयललिता की मृत्‍यु के बाद अभी तक यहां उनका मेमोरियल पूर्ण रूप से नहीं बन सका है. डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि के मरीना बीच पर अंतिम संस्कार को लेकर उठे विवाद पर मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है. डीएमके के वकील हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस हुलुवादी जी रमेश के निवास पर पहुंचे और कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा. डीएमके ने देर शाम इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने सुनवाई के लिए इजाजत दे दी थी. यद्दपि थोड़े समय में ये निश्चित हो जाएगा कि करुणानिधि का अंतिम संस्कार कहाँ किया जाएगा और अदालत की इस मामले में इतनी तेज़ी भी कई लोगों में सराहना का पात्र बनी हुई है . … 

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