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#अलविदा_अटल .. ये एक राजनेता की मृत्यु नहीं बल्कि एक युग का अंत है..


भारतरत्न पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेई लंबी बीमारी के बाद देवलोक गमन कर चुके हैं. लगभग दो महीने से एम्स में भर्ती अटल जी ने आज आपने जीवन की आख़िरी साँस ली. जैसे ही एम्स प्रशासन ने अटल जी के देहांत की घोषणा की, वैसे ही पूरा देश एकदम थम सा गया तथा हिंदुस्तान दुःख के सागर में डूब गया. अटल जी को जून में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से एम्स में भर्ती कराया गया था. अटल जी के निधन पर प्रधानमन्त्री मोदी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ट्विटर पर अटल जी को श्रद्धांजलि दी है तथा कहा है कि अटल जी ने ही भाजपा को देशभर में फैलाया.

अटल जी का जाना एक राजनेता की म्रत्यु मात्र नहीं है बल्कि ये एक युग का अंत है तथा हिन्दुस्तान में एक वो खालीपन है जिसकी कभी पूर्ती नहीं की जा सकती है. अटल जी एक ऐसे राजनेता थे जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफ़र तय किया. अटल जी द्वारा दो सीटों से शुरुआत करने वाली भाजपा की आज केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार है तथा आधे से ज्यादा राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री हैं. अटल जी को भारतीय राजनीति का पितामह कहा जाता है. भारत रत्न से सम्मानित वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, पहली बार 1996 में 13 दिनों के लिए फिर 1998 से 1999 और आखिरी बार 1999 से 2004 तक. देश के प्रधानमंत्री के साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी एक सर्वप्रिय कवि, वक्ता और समावेशी राजनीति के पर्याय थे. एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए वाजपेयी के लिए शुरुआती सफ़र आसान नहीं था. 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई थी. उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर के बाद पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया. उन्होंने राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया.

1942 के भारत छोडो आन्दोलन से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले अटल जी जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे तथा 1957 में पहली बार उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे तथा संसद के गलियारे में अपनी पांच दशकीय संसदीय करियर की शुरुआत की थी. 1968 से 1973 तक वो भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे. विपक्षी पार्टियों के अपने दूसरे साथियों की तरह उन्हें भी आपातकाल के दौरान जेल भेजा गया. 1977 में जनता पार्टी सरकार में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया. इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया और वो इसे अपने जीवन का सबसे सुखद क्षण बताते थे. 1979 में जनता सरकार के गिरने के बाद 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया. वाजपेयी इसके संस्थापक सदस्य थे और पहले अध्यक्ष भी. 1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे.

1962 से 1967 और 1986 में वो राज्यसभा के सदस्य भी रहे. 16 मई 1996 को वो पहली बार प्रधानमंत्री बने. लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा. इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे. 1998 के आम चुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत सिद्ध किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने. लेकिन यह सरकार भी केवल 13 महीनों तक ही चल सकी. एआईएडीएमके द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस ले लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर आम चुनाव हुए.  1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया. गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली. बतौर प्रधानमंत्री उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मई 1998 में परमाणु बम का परीक्षण शामिल है तथा अज भी इसके लिए अटल जी की सराहना की जाती है. 2009 में सत्ता की राजनीति से संन्यास लेते वक्त वो लखनऊ से सांसद थे. उन्हें 2014 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया. नरेंद्र मोदी सरकार उनके जन्मदिन 25 दिसंबर को ‘गुड गवर्नेंस डे’ के तौर पर मनाती है.


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