ध्वस्त होने लगा गठबंधन अभी से… मायावती और कांग्रेस आमने सामने..

भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ महागठबंधन बनने से पहले से ही ध्वस्त होता नजर आ रहा है. मायावती जानती हैं कि इस समय हर विपक्ष उलझन मैं है तथा वह इसका फायदा उठाना चाहती हैं. अब मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए ऐसी शर्त रख दी है जिससे कांग्रेस उलझन में पड़ गई. लोकसभा से पहले मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बहुजन समाजवाजदी पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने शनिवार को दिल्ली में एक बैठक की है. दिल्ली में हुई उस बैठक में मायावती ने तीन राज्यों के समन्वयकों, जिलाध्यक्षों और विधायकों से बात की है। उन सभी को अकेले दम पर चुनावी तैयारी में जुटने को कहा है. हालांकि इन राज्यों में वो कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़ेगी या नहीं उन्होंने इस पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। लेकिन उसके बाद भी मायावती अपने शर्तों पर चुनाव की तैयारी कर रही हैं.

दरअसल, कांग्रेस को लगता है कि वह राजस्थान में आसानी से जीत सकती है. इसकी इस फैसले को लेकर वह थोड़ा असमंजस में है. वहीं छत्तीसगढ़ में भी बीएसपी का अपना वोट बैंक है. बीएसपी चाहती है कि कांग्रेस अगर गठबंधन करे तो पार्टी को ठीक-ठाक सीटों पर चुनाव लड़ने की छूट दे. मायावती ने कांग्रेस ने कह दिया है कि अगर वह बसपा से गठबंधन चाहती है तो तो उसे बसपा को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में उसको उचित सीटें देनी होंगी तभी गठबंधन होगा. इन शर्तों को लेकर कांग्रेस थोड़े असमंजस में है. हालांकि कांग्रेस महागठबंधन के सपने को साकार करने में लगी हुई है. कांग्रेस चाहती है कि साल 2019 में चुनाव भारतीय जनता पार्टी बनाम देश की सभी पार्टियां लड़ा जाए, बसपा कांग्रेस की इसी मजबूरी का फायदा उठाना चाहती है.
वहीं राजस्थान में फिलहाल कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी है. लेकिन राजस्थान कांग्रेस का गढ़ है. वहां पर हर पांच साल बाद सत्ता कभी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) या कांग्रेस बीच घूमते रहती है. इस वजह से राजस्थान के दिग्गज कांग्रेस नेता सचिन पायलट वहां पर बीएसपी के साथ गठबंधन में नहीं जाना चाहते हैं. कांग्रेस ये चाहती कि बसपा सिर्फ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के लिए उसके साथ गठबंधन करे. जबकि मायावती चाहती हैं कि गठबंधन तीनों जगह पर हो। लेकिन कांग्रेस इस बात के लिए तैयार नहीं है. मायावती जहां तीन जगह गठबंधन की बातों लेकर अड़ी हैं. मायावती की इसी जिद ने कांग्रेस के माथे पर बल ला दिए हैं.

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