PFI प्रेमी, जिन्ना के प्रेम के बाद अब शरिया समर्थक निकले अंसारी.. इनके हाथ मेंभी कभी देश की बागडोर

एकसमय वह देश के माननीय थे तथा देश का दुसरा सर्वोच्च पद उनके पास था लेकिन शायद देश को नहीं पता था कि उन्हें देश का संविधान नहीं बल्कि इस्लामिक कानून शरिया पसंद है. संविधान की कसम लेकर १० साल तक उपराष्ट्रपति रहे लेकिन पदमुक्त होने के बाद संविधान के बजाय शरिया कोर्ट के समर्थन में खड़े हो गए. खैर वो देशविरोधी इस्लामिक संगठन PFI का समर्थन भी कर चुके हैं तथा देश के बंटवारे के जिम्मेदार जिन्ना के प्रति प्रेम भी दिखा चुके हैं.

हम बात कर रहे हैं पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की जिन्होंने शरिया कोर्ट का समर्थन किया है तथा एकतरह से देश को तोड़ने की, गृहयुद्ध की ओर धकेलने वाला बयान दिया है.शरिया अदालत गठित करने के सुझाव पर हो रहे विरोध के बीच पूर्व उपराष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी के बयान ने एक और नई बहस शुरू कर दी है. इस मसले पर अंसारी ने कहा है कि कानून मानता है कि हर समुदाय के पास अपना नियम हो सकता है. उन्होंने कहा कि लोग सामाजिक प्रथा के साथ कानूनी प्रणाली का घालमेल कर रहे हैं. एक निजी टेलीविजन चैनल को गुरुवार को दिए गए साक्षात्कार में पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘लोग सामाजिक प्रथा के साथ कानूनी प्रणाली का घालमेल कर रहे हैं.  भारत में पर्सनल लॉ चार विषयों शादी, तलाक, विरासत और गोद लेना को अपने दायरे में रखता है. भारत में हर समुदाय को हमारे कानून के अनुसार चलने का अधिकार है.

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि उसने दारुल-कजा (शरिया अदालतें) खोलने की योजना बनाई है. यह इस्लामिक कानून के अनुसार मुद्दों का समाधान करने के लिए किया जाएगा। हालांकि सरकार ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. हामिद अंसारी ने कहा कि भारत के एक अनुदार, बहुसंख्यक लोकतंत्र में बदल जाने का खतरा पैदा हो गया है. ऐसी स्थिति में धार्मिक अल्पसंख्यक बराबरी के नागरिक नहीं रहेंगे जो खतरनाक होगा.

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