अदालत में माँगा गया था चन्दन के लिए शहीद का दर्जा और कातिलों के खिलाफ NIA जांच. पता है जज साहब ने क्या कहा ?

बड़ी टकटकी लगाए बैठे थे चन्दन के परिवार वाले अदालत की तरफ . उन्हें लगा था शायद याचिकाकर्ता भाजपा नेता दिलीप श्रीवास्तव के प्रयासों से उनके दिवंगत बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी लेकिन अचानक ही उनकी सभी उम्मीदें टूट कर बिखर गयी और इसके साथ एक और फैसले से वहां के कट्टरपंथी समाज में फ़ैल गयी ख़ुशी की लहर क्योकि वो मांग कहीं न कहीं उनमे भर रही थी खौफ . 

ज्ञात हो कि कासगंज हिंसा के बेहद सनसनीखेज मुद्दे पर इलाहाबाद पीठ हाईकोर्ट ने बलिदानी चन्दन के परिजनों और याचिकाकर्ता भाजपा भाजपा नेता दिलीप श्रीवास्तव के अरमानो पर पानी फेर दिया है . इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भाजपा नेता एडवोकेट दिलीप श्रीवास्तव की उस याचिका को कर दिया है जिसमें उन्होंने दंगे के दौरान मारे गए नौजवान चन्दन गुप्ता को शहीद का दर्जा देने की मांग की थी।

इस याचिका की सबसे ख़ास बात ये थी कि आतंक का काल मानी जाने वाले NIA से कासगंज के कातिलो को सजा दिलाने की मांग के साथ चन्दन के घर वालों को मुआवजा 50 लाख करने की मांग हुई थी .  इस मुद्दे पर न्यायाधीश महोदय का कहना था कि चंदन को शहीद का दर्जा नहीं दिया जा सकता। इसके साथ अदालत ने मुआवजा की राशि बढाने के मुद्दे पर अपना कोई आदेश देने से मना करते हुए इस मामले की NIA जांच की मांग को भी ख़ारिज कर डाला ..न्यायाशीश महोदय का मानना था कि जब राज्य सरकार ने उसकी जाँच की ज़िम्मेदारी एसआईटी को सोंपी है साथ ही मजिस्ट्रेट जाँच भी शुरू हो चुकी है ऐसे में एनआईए जाँच का आदेश नहीं दिया जा सकता। NIA जांच की मांग खारिज होने के बाद कासगंज के कट्टरपंथियों में एक प्रकार से ख़ुशी मनाई. 

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