भारत का गृह मंत्रालय बोल उठा… कोई कितना भी शोर मचाये, रोहिंग्याओं को जाना ही होगा

देश की राजनीति इस समय असम की NRC रिपोर्ट को लेकर गरमाई हुई है क्योंकि NRC की इस रिपोर्ट में 40 लाख लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सके हैं तथा घुसपैठिये पाए गये हैं. NRC की रिपोर्ट को लेकर कल भी संसद में हंगामा हुआ तथा TMC, SP, कांग्रेस, आप तथा वामदलों ने NRC को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया तथा कहा कि मोदी सरकार अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है तथा एक साजिश के तहत ऐसा कर रही है.

बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर संसद में मचे बवाल के बीच रोहिंग्या मुस्लिमों का मुदा भी उठा जिस पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने साफ़ कर दिया कि कोई कितना भी प्रयास कर ले, कुछ भी कर ले लेकिन रोहिंग्याओं को जाना ही होगा..हर हाल में जाना होगा. विपक्ष की सारी दलीलों को दरकनिकार करते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सरकार की इस विषय पर म्यांमार से बातचीत चल रही है. उन्होंने फरवरी 2018 में जारी अडवाइजरी का जिक्र कर राज्य सरकारों से रोहिंग्याओं पर नजर रखने की अपील की तथा कहा कि वह रोहिंग्याओं की गणना कराएं, कागजात इकट्ठे करें क्योंकि रोहिंग्याओं को भारत से हर हाल में जाना ही होगा. गृहमंत्री जी ने कहा कि वह इस बात को मानते हैं कि रोहिंग्या कोई शरणार्थी नहीं है बल्कि घुसपैठिये हैं.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार रोहिंग्याओं के मुद्दे पर अडवाइजरी जारी कर चुकी है. विपक्षी पार्टियों के सरकार के भेदभाव के आरोप पर राजनाथ सिंह ने कहा, ‘राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे राज्य में रोहिंग्याओं की संख्या आदि के बारे में गृह मंत्रालय को सूचना दें. इसी के आधार पर जानकारी विदेश मंत्रालय को दी जाएगी और विदेश मंत्रालय म्यांमार के साथ इनको डिपोर्ट करने पर बातचीत करेगा.’ राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ रोहिंग्याओं की पहचान आवश्यक है और बॉयोमीट्रिक जांच के जरिए रोहिंग्याओं की पहचान की जा सकती है.’ गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि रोहिंग्या भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती हैं तथा कोई कितने भी तर्क दे, रोहिंग्याओं से हमदर्दी दिखाए लेकिन हमारी सरकार ये मानती है कि रोहिंग्या अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं, देश की सुरक्षा के लिए खतरा है इसलिए उन्हें वापस भेजा जाएगा. रोहिंग्याओं को वापस भेजने में हो रही देरी पर गृहराज्य मंत्री ने कहा कि कुछ कानूनों का भी पालन करना होता है लेकिन में सदन के माध्यम से देश को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि उनकी सरकार रोहिंग्याओं को वापस भेजेगी.

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