40 लाख बंगलादेशी बस असम में होने की आहट .. फिर पूरे देश का क्या होगा हाल ?

जरा सोचिये उस देश का जहां बाहरी घुसपैठियों की संख्या उनके देश में प्रतिशत की हिस्सेदारी लेने लगे , फिर भी उस देश में बाहरी तत्वों को घुसने की अनुमति दिलाने के लिए कुछ बुद्धिजीवी कोर्ट आदि के चक्कर लगा रहे हों .. जी हाँ . तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के कुप्रभाव अब देखने को मिलने लगे हैं जब बंगलादेशियो के कहर से न सिर्फ आपराधिक घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो रही है अपितु एक राज्य के साथ पूरे देश की जनसंख्या का असंतुलन हो रहा है . विदित हो कि असम में हुई जनगणना में जो परिणाम सामने आये हैं वो किसी को भी चौंकाने वाले हैं और देश को आने वाले खतरे से सतर्क भी कर रहे हैं . 

असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के दूसरे और अंतिम ड्राफ्ट को जारी कर दिया गया है. रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक, 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें 2.89 करोड़ वैध नागरिक पाए गए हैं, जबकि 40 लाख लोग नागरिकता से बाहर हो गए हैं. यह ड्राफ्ट सुबह 10 बजे राज्य के सभी एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके) सहित ऑनलाइन भी प्रकाशित किया गया है. बंगलादेशियो और उनके समर्थको के दुस्साहस को देखते हुए पूरे राज्य के साथ आस पास के प्रदेशो में भी सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गयी है और न सिर्फ पुलिस को अपितु अर्धसैनिक बलों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है .

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रजिस्टर जारी होने के बाद दिए एक बयान में कहा, “अंतिम एनआरसी में किसी का नाम नहीं होने के बावजूद भी ट्राइब्यूनल का रास्ता खुला रहेगा. उन्होंने कहा, “एनआरसी की प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्षता के साथ की गई है. आगे भी पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ पूरी की जाएगी. ये पूरी प्रक्रिया माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में संपन्न हुई है.. असम और आसपास के राज्यों में क़रीब 22 हज़ार अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है.असम देश का इकलौता राज्य है जहां के लिए इस तरह के सिटिज़नशिप रजिस्टर की व्यवस्था है. इस तरह का पहला रजिस्ट्रेशन साल 1951 में किया गया था.


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