मोदी ने खुद बताया कि क्यों उनके खिलाफ एक हो रहे हैं विपक्षी ??

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की लोकप्रियता तथा जनता के बीच स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक दूसरे की जानी दुश्मन पार्टियां अपना वजूद बचाने के लिए महागठबन्धन की बात कर रही हैं. जो राजनेता एक दूसरे की ओर देखते तक नहीं थे वो मोदी को हारने के लिए गलबहियां कर रहे हैं. अपने खिलाफ बन बन रहे इस महागठबंधन पर अब स्वयं मोदी जी ने चुप्पी तोड़ी है तथा बड़ा बयान दिया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष के प्रस्तावित महागठबंधन को अपने प्रतिद्वन्दियों की प्रधानमंत्री बनने का महादौड़ करार दिया जो निजी अस्तित्व और सत्ता की राजनीति से प्रेरित है. मोदी ने ‘स्वराज्य’ पत्रिका को दिये साक्षात्कार में कहा कि विपक्ष के पास उन्हें हटाने के अलावा कोई और एजेंडा नहीं है और ”मोदी के प्रति घृणा” इन्हें बांधे रखने का एकमात्र कारक है. प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अगले लोकसभा चुनाव में लोग भाजपा को जनादेश देकर सत्ता में दोबारा लायेंगे.

कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा खारिज कर दिये जाने के बाद मुख्य विपक्षी पार्टी अब अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही है और अपने सहयोगियों की तलाश में हर ओर जा रही है. प्रधानमंत्री ने अगले लोकसभा चुनाव को सुशासन एवं विकास तथा अफरातफरी के बीच पसंद बनाने का मुकाबला बताया. उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस और जदएस ने सरकार बनाने के लिये जनादेश हथिया लिया और विकास का मुद्दा पीछे चला गया. कर्नाटक को झलकी करार देते हुए उन्होंने कहा, ”किसी भी चुनाव में बिना विचारधारा और अवसरवादी गठजोड़ अफरातफरी की गारंटी होता है.” उन्होंने कहा कि आप उम्मीद करते हैं कि मंत्रियों की बैठक विकास के मुद्दों का निपटारा करने के लिये होगी लेकिन कर्नाटक में वे आपसी लड़ाई को सुलझाने के लिये बैठक करते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ती है और एक के बाद एक राज्य में उसे मिल रहा जनादेश ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा, ”और इसलिये मुझे विश्वास है कि लोग हमारे उपर भरोसा करेंगे. उनका (विपक्ष) मोदी को हटाने के अलावा और कोई एजेंडा नहीं है. मोदी के प्रति धृणा उन्हें एकसाथ जोड़े रखने का एकमात्र कारक है.” प्रधानमंत्री ने विपक्ष की एकजुटता के प्रयासों की तुलना 1977 और 1989 के चुनाव के समय विपक्ष की पहल से करने को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि 1977 में आपातकाल के बाद लोकतंत्र को बचाने के लिये विपक्षी दल साथ आए थे और उसके 12 वर्ष बाद बोफोर्स से जुड़े भ्रष्टाचार ने पूरे देश को आहत किया था.

मोदी ने कहा कि आज जो गठबंधन की बात हो रही है, वह अपने अस्तित्व और सत्ता की राजनीति से प्रेरित है. इनका देशहित से कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा कि विपक्ष का पूरा ध्यान सत्ता की राजनीति पर है जहां राहुल गांधी कह रहे हैं कि वह प्रधानमंत्री बनने के लिये तैयार हैं, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की भी इस पद पर नजर है लेकिन वामदलों को उनसे समस्या है. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सोचती है कि उसके नेता किसी अन्य की बजाए प्रधानमंत्री बनने के पात्र हैं. उन्होंने कहा कि इन दलों के नेताओं की आपसी नापसंदगी और अविश्वास कितने समय तक एक दूसरे को साथ रख सकता है। यह पूछे जाने पर कि राजग के सभी सहयोगी दल क्या साथ हैं और क्या राजग आज कमजोर हुई है, प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि उनकी पार्टी गठबंधन को मजबूरी नहीं बल्कि विश्वास के प्रतीक के रूप में देखती है. उन्होंने कहा कि बड़ा और विविधतापूर्ण राजग भारतीय लोकतंत्र के लिये अच्छा है और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान करना सबसे जरूरी है. राजग इसे पूरा करने के लिये प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले आम चुनावों मैं न सिर्फ भाजपा बल्कि राजग को भी पहले से ज्यादा सीटों पर विजयश्री हासिल होगी.

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