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सुदर्शन की खबर से हिला सत्ता का सिंहासन… विदेश मंत्रालय ने जारी किये तन्वी बनी साहिदा के पासपोर्ट की जांच के आदेश

लखनऊ पासपोर्ट विवाद मामले में सुदर्शन न्यूज़ द्वारा चलाई मुहिम का सकारात्मक परिणाम सामने आया है तथा ये खबर उन तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगों पर कहर बनकर गिरने वाली हैं जिन्होंने इस विवाद को धार्मिक रूप देकर एक ईमानदारी अधिकारी विकास मिश्रा को कटघरे में खड़ा किया तथा हंगामा किया. तन्वी अनस पासपोर्ट विवाद मामले  में जो बड़ी खबर सामने आ रही है वो ये है कि विदेश मंत्रालय ने तन्वी अनस के पासपोर्ट के जाँच के आदेश दे दिए हैं तथा LIU अब दोनों के पासपोर्ट की जाँच करेगी तथा तथ्यों में गड़बड़ी पाए जाने पर पासपोर्ट जब्त भी हो सकता है.

 


गौरतलब है कि सुदर्शन ने पहले दिन से ही इस खबर को प्रमुखता से उठाया तथा कहा था कि पासपोर्ट विभाग के लखनऊ ऑफिस में अधिकारी विकास ने पूरी ईमानदारी से अपना काम किया तथा जिस तरह से तन्वी व अनस को पासपोर्ट दिया गया उसकी जाँच होनी चाहिए. और आखिरकार सुदर्शन की खबर का असर उस समय दिखाई दिया जब विदेश मंत्रालय ने तन्वी तथा अनस के पासपोर्ट की जाँच के आदेश दे दिए.  पुलिस का कहना है कि तन्वी के कई नाम प्रयोग किए जाने की बात सामने आ रही है. विदेश मंत्रालय ने भी उनके सत्यापन की जांच करने को कहा है, इसलिए फिर से दंपती के दस्तावेजों और उनकी जांच की जाएगी.

इस मामले में एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें तन्वी और अनस की जांच के लिए शुक्रवार को पत्र मिला है. सीओ एलआईयू राधेश्याम ने बताया कि कि पत्र में कहा गया है कि दंपती के अस्थाई पते, अभी जहां वे रह रहे हैं उस पते दोनों का सत्यापन किया जाए. दोनों की जांच उसी तरह होगी, जिस तरह दूसरे पासपोर्ट के आवेदनकर्ताओं की होती है तथा अगर कोई भी गड़बड़ी पाई जाती है तो पासपोर्ट जब्त भी हो सकता है. बता दें कि तन्वी नाम की एक महिला ने पासपोर्ट अधीक्षक पर धर्म के नाम पर अपमानित करने का आरोप लगाया था. उन्होंने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी ट्वीट किया था. इसके बाद जहाँ तन्वी तथा उसके पति अनस सिद्दीकी को एक घंटे में पासपोर्ट जारी किया गया वहीं अधिकारी विकास मिश्रा का तबादला कर दिया गया तथा देश के मीडिया व तथाकथित सेक्यूलर समाज ने विकास मिश्रा को कटघरे में खड़ा किया था.

पूरे मामले कि सुर्खियां बनने पर अधीक्षक विकास मिश्रा ने कहा था, ‘तन्वी सेठ के निकाहनामा पर उनका नाम ‘शादिया अनस’ लिखा हुआ था. मैंने उसी के मुताबिक नाम लिखने को कहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया.’ उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए गहन जांच करनी होती है कि कोई व्यक्ति पासपोर्ट के लिए अपना नाम तो नहीं बदल रहा है. तन्वी ने ख़ुद अपनी ऐप्लिकेशन में लिखा था कि वह 12 साल से नोएडा में रह रही हैं, फिर उन्होंने पासपोर्ट लखनऊ में क्यों अप्लाई किया? उनकी ऐप्लिकेशन इसी आधार पर रद्द हो जानी चाहिए थी. लेकिन इसके बाद भी जहा हरा तरफ से विकास मिश्रा की आलोचना की जा रही थी लेकिन वो सुदर्शन था जो न सिर्फ विकास मिश्रा के समर्थन में खड़ा रहा बल्कि ये भी मांग की कि पूरे मामले कि जाँच की जाये तथा अधिकारी के अनुसार पासपोर्ट को जब्त किया जाये. आखिरकार विदेश मंत्रालय झुका तथा तन्वी-अनस के पासपोर्ट की जाँच के आदेश दे दिए. 

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