PHD स्कालर बना आतंकी .. जिस राष्ट्र ने दिया अनुदान और सुविधाएँ उसी को तबाह करने की खाई कसम

वो हिन्दुस्तान में रहता था, हिन्दुस्तान की हवा में सांस लेता था, हिन्दुस्तान का ही खाता था तथा हिन्दुस्तान से हर वो सुविधा लेता था जो चाहिए थी. लेकिन इस सबके बाद भी उसके दिल में हिन्दुस्तान के लिए मोहब्बत नहीं बल्कि हिन्दुस्तान के प्रति नफरत भरी थी. फिर एक दिन उसने शपथ ली कि वह हिन्दुस्तान को तबाह कर देगा. इसके बाद उसने बंदूक उठाई तथा इस्लामिक आतंकी संगठन में शामिल हो गया. ख़ास बात ये है कि देश मैं थ्योरी गढ़ी जाती रही कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता लेकिन वसीम अहमद ने इंशाअल्लाह बोलकर हिन्दुस्तान को तबाह करने के इरादे से बंदूक उठाई है.

हम से मत मांगो देशभक्ति के सबूत वाले शब्द ने भले ही कइयो के मुह बंद करवा दिए हों जिन्हें वोटबैंक जैसी कोई चीज से वास्ता हो लेकिन अब तो सवाल बनता ही है कि आखिर एक PHD स्कालर ने खुद को खुद से आंतक की राह में क्यों मोड़ा ? उसको अपने इलाके में एक ऐसा नाम माना जाता था जो देशभक्ति के लिए प्रसिद्ध था . सब कहते थे कि अगर मुस्लिमो की देशभक्ति देखनी है तो वसीम अहमद को देखो लेकिन उसने दिया राष्ट्र को इतना बड़ा धोखा जो कईयों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है . इस गद्दार आतंकी ने उस बयान पर भी सवाल खड़ा कर दिया जिसमे कहा जाता रहा है कि अशिक्षा आतंकी बनाती है क्योकि अगर वो सच होता तो PHD कर के आतंकी क्यों बनता ?

एकतरफ भारत सरकार कश्मीर में शांति के तमाम प्रयास कर रही है तथा कश्मीरियों की भलाई के लिए, विकास के लिए तमाम योजनायें भी चला रही है ताकि कश्मीर के लोग राष्ट्र की उन्नति में प्रगति में बढ़-चढ़ कर अपना योगदान दें तथा न सिर्फ अपना बल्कि अपने आनी वाली पीढ़ियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएं. यही कारण था कि जब पूरा देश आतंकियों के खिलाफ आक्रोशित था लेकिन उसके बाद भी भारत सरकार ने कशमीर में रमजान माह में सीजफायर का एलान कर दिया लेकिन लगता है कि मजहबी उन्मादी मानसिकता से ग्रसित लोगों को भारत सरकार के शांति के प्रयास रास नहीं आ रहे हैं.

एक बार फिर से भारत सरकार के कश्मीर में किये जा रहे शांति प्रयासों को धता बताते हुए एक और कश्मीरी ने खुद को आतंकी घोषित कर दिया है और कसम ली है भारत के सैनिको के खिलाफ जंग लड़ने और हिन्दोस्तां को फतह करने की.  इस PHD आतंकी वासिम ने आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का हाथ थामा है जो कश्मीरी हिन्दुओ के नरसंहार में सबसे आगे रहा है .. इस आतंकी का नाम वसीम अहमद और इसके अब्बा का नाम बशीर अहमद है . ये कश्मीर के कुलगाम क्षेत्र के अश्मुजी नामक जगह का रहने वाला है जो दक्षिण कश्मीर में पड़ता है . कुछ लोगों का कहना है कि ये पहले से ही आतंकियों के सम्पर्क में था और अपने साथी आदिल अहमद की मौत के बाद उसकी गैंग सम्भालने के लिए आतंकी बन गया . आदिल को CRPF ने मार गिराया था जब वो सद्दाम पेद्दार को बचाने की कोशिश कर रहा था . 

बताया जा रहा है कि ये गद्दार आतंकी अपने साथी की लाश पर खड़ा हो कर जोर जोर से भारत विरोधी नारे लगाए और वहीं से फिर गायब हो गया और फ़ौज के खिलाफ जंग लड़ने की कसम खाते हुए अपनी पीएचडी की डिग्री आदि भूल गया और बन गया आतंक समर्थक से सीधे सीधे आतंकी .. बताया ये भी जा रहा है कि पढ़े लिखे होने के कारण लोग वसीम के पास अपने बच्चो को पढने भेजते थे .. अब शक जताया जा रहा है कि वो उन बच्चो को आतंक की शिक्षा दिया करता रहा होगा ..  गद्दार आतंकी वसीम ने कश्मीर युनिवर्सिटी से पीएचडी किया था जिसमे उसका विषय इंग्लिश था . 

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