उन्नाव रेप मामले में #CBI ने खोल डाला सारा राज, शायद इसीलिये डर रहे कठुआ के साजिशकर्ता CBI से


देश में इस समय उन्नाव तथा कठुआ रेप को लेकर भूचाल मचा हुआ है. उन्नाव मामले को लेकर सीधे योगी सरकार पर हमले किये जा रहे हैं क्योंकि पीडिता ने आश्चर्यजनक रूप से रेप के 1 वर्ष बाद भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर को आरोपी बताते हुए कहा कि उसका रेप भाजपा विधायक ने किया था जिसके बाद योगी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी तथा विधायक कुलदीप सेंगर को गिफ्तार करके सीबीआई जांच में जुटी हुई है. उन्नाव मामला सीबीआई के हाथ में आने के बाद इस मामले में एक न्य खुलासा हुआ है जिसे जानकर न सिर्फ सीबीआई बल्कि आम जनमानस भी दंग रह गया है.

गौरतलब है कि भाजपा विधायक पर  पॉक्सो एक्ट के तहत के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पीड़िता के नाबालिग रहने की स्थिति में ही पॉक्सो एक्ट लगाया जाता है और पीडिता के दावा किया है कि बलात्कार के वक्त उसकी आयु 16 साल थी जिसके बाद विधायक पर सीबीआई ने पॉक्सो अव्त के तहत मामला दर्ज किया. लेकिन अब इसको लेकर जाँच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है. जानकारी मिल रही है कि 2017 की एक मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, उन्नाव रेप पीड़िता की उम्र 19 साल से अधिक है. अंग्रेजी अखबार एचटी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस द्वारा रिकवर करने के दो दिन बाद 22 जून 2017 को उन्नाव के जिला अस्पताल में पीड़िता की पहली मेडिकल जांच हुई थी तथा उन्नाव के जिला अस्पताल में डॉ. एसके जौहरी ने जांच की थी. उस वक्त पुलिस ने 3 लोगों को रेप और किडनैपिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था.

जानकारी के मुताबिक तब आरोपियों पर पॉक्सो नहीं लगाया गया था. 22 जून 2017 को पीडिता की मेडिकल जांच करने वाले डॉ. जौहरी ने कहा- ‘तब कांस्टेबल रूबी सिंह लड़की को लेकर आईं थीं. तब सीएमओ ने मेडिकल एग्जामिनेशन करने को कहा था. उसके कई एक्सरे किए गए थे और हड्डियों के विकास के आधार पर मैंने उसकी उम्र 19 साल से अधिक बताई थी. मैं अपनी जांच पर आज भी कायम हूं. डॉ. जौहरी के इस दावे के बाद सीबीआई भी शंकित है कि मामले को जानबूझकर उलझाने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि विधायक कुलदीप सेंगर पर आरोप लगते समय युवती ने दावा किया है कि उसका जन्म सन 2000 में हुआ है. जिसके कारण सीबीआई ने एक बार फिर पीडिता की मेडिकल जांच कराई है.

शायद यही कारण हो सकता है कि कठुआ मामले की सीबीआई जांच से इनकार किया जा रहा है. इतिहास में शायद ये पहली बार हो रहा है कि चाहे कठुआ का मामला हो या उन्नाव का, दोनों जगह आरोपी चीख-चीख कर रहे हैं कि मामले की सीबीआई जाँच कराओ, उनका नार्को टेस्ट कराओ ताकि सच सामने आ सके लेकिन आश्चर्यजनक रूप से दोनों जगह पीड़ित पक्ष न सिर्फ नार्को टेस्ट बल्कि सीबीआई जाँच से भी इनकार कर रहा है. हालाँकि उन्नाव मामले की सीबीआई जाँच शुरू हो गयी है जिसके बाद एक झूठ सामने आता नजर आ रहा है कि पीडिता नाबालिग नहीं है. ये भी एक कारण हो सकता है कि अगर कठुआ मामले की सीबीआई जाँच हुई तो उसमें भी उन्नाव की तरह कुछ झूठ सामने आ सकते हैं जैसे कि आरोपी पक्ष दावा कर रहा है कि वो निर्दोष हैं और वास्तविक आरोपियों को बचाने के लिए उन्हें फंसाया जा रहा है और उनका नार्को टेस्ट होता है तथा सीबीआई जाँच होती है तो ऐसा ही छिपा राज सामने आने की संभावना है.


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