वापस पाकिस्तान लौट गये कई कराहते हिन्दू बिना भारतीय नागरिकता के लेकिन पाकिस्तान के 3 मुस्लिम ख़ुशी ख़ुशी पा गए भारतीय नागरिकता. जिंदाबाद है धर्मनिरपेक्षता

वो समय सबको याद है जब पाकिस्तान से भारत अपना धन और इज्जत लुटा कर केवल अपना धर्म बचा कर आये कई हिन्दुओ को सीधे सीधे नकार दिया गया था और उन्हें नागरिकता देने से मना करते हुए वापस भेज दिया गया था जहाँ उनका सामूहिक धर्मांतरण हो गया था . उनकी चीखे मतांतरित होते हुए भी कई अख़बारों की सुर्खियां बनी थी लेकिन अब एक या दो दिन में वो आवाज खामोश हो गयी थी और धीरे धीरे उनके नाम भी गुमनाम हो गए हैं . अभी भी कश्मीर में कई हिन्दू एक साथ एक जगह रह रहे हैं जिन्हे भारत की नागरिकता आज़ादी के बाद से नहीं मिली है और वो इस देश में तिरस्कृत भावना से देखे जाते हैं.. लेकिन भारत में एक बार विधिवत ढंग से निभाई गयी है धर्मनिरपेक्षता और तीन पाकिस्तानी मुसलमानो को दे दी गयी है नागरिकता ..

ज्ञात हो की पाकिस्तान में पैदा हुए तीन भाइयों को तेलंगाना के निजामाबाद में भारतीय नागरिकता प्रदान की गई। मोहम्मद सनान (29) उनके छोटे भाई रुमान (27) और सैफ (25) को भारत सरकार द्वारा भारतीय नागरिकता दी गई। सेकुलर समाज और सेकुलर पार्टियां इस नागरिकता को भाईचारे की जीत बताते हुए धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कदम बता रही हैं .  निजामाबाद के राजस्व मंडल अधिकारी टी. विनोद कुमार ने मंगलवार को तीनों की मां फैज़ुन्निसा की उपस्थिति में उन्हें नागरिकता सम्बन्धी प्रतियां सौंपीं। नागरिकता के लिए अपने आवेदनों की जानकारी के बाद गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किए। आदेश 24 अप्रैल को नागरिकता अधिनियम-1955 की धारा 5 (1) एफ के तहत जारी किए गए। नागरिकता दस्तावेज प्रतियां संख्या: 243; 244 और बाद में 245 जिला अधिकारियों को भेजा गया। जिस पर फौरी तौर पर कार्यवाही हुई . 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने आठ साल पहले नागरिकता के लिए आवेदन किया था। हफीज अब्दुल रहमान और सामदी बेगम की पुत्री फैज ने 1988 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर के मोहम्मद अब्दुल नादीम जावेद से शादी की। निकाह शादी के बाद वह पाकिस्तान चली गई, लेकिन अपनी भारतीय नागरिकता का त्याग नहीं किया। उसके तीन बेटे पैदा हुए थे। 2004 में पाकिस्तानी पति को तलाक देने के बाद वह अपने तीन बेटों के साथ निजामाबाद चली आई और वे यहां दीर्घकालिक वीज़ा (एलटीवी) पर रह रहे हैं।  विवरण प्रकट करने से इनकार करते हुए फैज और उसके बच्चों ने नागरिकता दस्तावेज प्राप्त करने के तुरंत बाद आरडीओ कक्ष छोड़ दिए। सूत्रों के मुताबिक, वह अपने बच्चों और भाई-बहनों के साथ कई सालों से पुराने शहर में एक निजी स्कूल चला रही हैं।  इस मामले में जिला कलेक्टर एम राम मोहन राव ने कहा कि भारत सरकार ने तीन पाकिस्तानी नागरिकों को नागरिकता दी है, केवल यह आश्वस्त होने के बाद कि उनके साथ कोई कानून और व्यवस्था समस्या नहीं होगी।

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