समलैंगिक संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चर्चा में आया मुगल आक्रान्ता “खिलजी”… बड़ी रकम देकर खिलजी ने खरीदा था समलैंगिक पार्टनर

सुप्रीम द्वारा समलैंगिक संबंधों को अवैध बताने वाली धारा 377 को खारिज करने के बाद देशभर से तरह तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को कानूनी मान्‍यता दे दी है. एकतरफ जहाँ समलैंगिक संबंधों के पक्षधर जहाँ इस फैसले से खुश हैं वहीं देश के ज्यादातर लोग इस फैसले से न सिर्फ निराश हैं बल्कि आक्रोशित भी हैं तथा इस फैसले को भारतीय संस्क्रती, भारतीय गौरवशाली परंपरा पर बड़ा हमला मान रहे हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक स्न्बन्द्धों को मान्यता देने के बाद मुगल शासक अलाउद्द्दीन खिलजी एक बार फिर से चर्चा में आ गया है तथा शोशल मीडिया पर खिलजी को लेकर काफी कुछ लिखा रहा है. बता दें कि इतिहास में खिलजी को समलैंगिक बताया गया है.

दरअसल जब संजय लीला भंसाली की फिल्‍म ‘पद्मावत’ रिलीज हो रही थी उस समय भी महासती मां पद्मिनी के के अलावा खिलजी का भी जिक्र हुआ था. अलाउद्दीन खिलजी के बारे में कहते हैं कि वह एक गे था और उसके नौकर मलिक कफूर के साथ उसके अन्तरंग संबंध थे. बताया गया है कि अलाउद्दीन खिलजी पुरुषों और खासकर बिना दाढ़ी वाले पुरुषों के लिए आकर्षित था. कई किताबों में इस बात का दावा किया गया है कि उसके हरम में करीब 50,000 पुरुष थे जो उसके साथी थे तथा वह अपनी पसंद के अनुसार उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता था. खिलजी के इस लव इंट्रेस्‍ट का कहानी मलिक कफूर नामक व्‍यक्ति के बारे में सर्च करने पर भी पता चलती है. खिलजी ने गुजरात में जीत हासिल करने के बाद काफूर को एक हजार दिनार देकर खरीदा था.  कफूर का नाम कहीं-कहीं पर ‘कफूर हजार दिनारी’ भी मिलता है. खिलजी और कफूर के संबंधों के बारे में तारीख-ए-फिरोजशाही समेत कई किताबों में लिखा गया है.  कहते हैं कि खिलजी के हरम में जो 50,000 पुरुष थे वे सभी बिना दाढ़ी वाले थे.

इतिहास में दावा है कि खिलजी, कफूर की खूबसूरती के आगे खुद को बेबस महसूस करता था और कफूर को पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार था. इसके बाद खिलजी ने 1 हजार दिनार देकर कफूर को खरीदा था. कफूर और खिलजी की करीबियां इतनी थी कि कफूर को खिलजी ने मिलिट्री कमांडर यानी मालिक नायब बना दिया था. कहा तो ये भी जाता है कि कफूर ने ही खिलजी की मौत की साजिश भी रची थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खिलजी का जिक्र इसलिए भी हो रहा है क्योंकि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा है कि इस फैसले के बाद कुछ कट्टरपंथी मौलाना काफी खुश होंगे क्योंकि ये फैसला उनको मन माँगी मुराद है. इस पर लोगों की प्रतिक्रिया है कि खिलजी की परंपरा को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है.

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