#AlvidaAtal जब अटल जी ने कहा था- “अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा”.. और आज अटल जी की भाजपा का कमल देशभर में खिला हुआ है

भारतरत्न पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेई जी अब हमारे बीच नहीं हैं, जननायक के तौर पर जाने वाले अटलजी ने एम्स में आपने जीवन की आखिरी सांस ली. अटल जी एक महानतम राजनेता तो थे ही साथ ही एक शानदार कवि तथा मोटिवेट स्पीकर भी थे. भाजपा कार्यकर्ताओं को उनका एक सन्देश “अँधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा” आज भी एक अलग ही ऊर्जा से भर देता है. आज जब अटल जी हमारे बीच नहीं है तो हम आपको बताने वाले है कि अटल जी ने प्रेरणादायी वाक्य कब प्रयोग किया था.

सभी जानते हैं कि अटल जी ने 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की थी तथा भाजपा के प्रथम अधिवेशन में अटल जी ने अपने भाषण के दौरान ये सन्देश दिया था. अटल बिहारी वाजपेयी ने 1980 में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के पहले अधिवेशन में अपने दमदार भाषण से देश की राजनीति को नई दिशा में ले जाने पर बल दिया. पहले अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने देश की राजनीति के साथ ही उन नेताओं पर भी सवाल खड़े किए जो पद और प्रतिष्ठा की ताक में रहते हैं. भाजपा के पहले अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘भाजपा का अध्यक्ष पद कोई अलंकार की वस्तु नहीं है. ये पद नहीं दायित्व है, प्रतिष्ठा नहीं है परीक्षा है, ये सम्मान नहीं है चुनौती है. मुझे भरोसा है कि आपके सहयोग से देश की जनता के समर्थन से मैं इस जिम्मेदारी को ठीक तरह से निभा सकूंगा.’ अटल बिहार वाजपेयी ने कहा, ‘जिस परिस्थितयों में भारतीय जनता पार्टी का निर्माण हुआ मैं उसमें नहीं जाना चाहता. देश की राजनीति को अगर नैतिक मूल्यों पर चलाने का संकल्प किसी ने किया है और जो लोग उस संकल्प को कार्य में परिणत करने की शक्ति रखते हैं वो भाजपा के मंच पर इकट्ठा हो गए.’

आपने भाषण में अटल जी ने कहा था,  ‘भारतीय जनता पार्टी जयप्रकाश के सपनों को पूरा करने के लिए बनी है. भाजपा टूट गई, लेकिन हम जयप्रकाश के सपने को टूटने नहीं देंगे. जयप्रकाश किसी व्यक्ति का नाम नहीं है, जयप्रकाश कुछ आदर्शों का नाम है, कुछ मूल्यों का नाम है.’  उन्होंने कहा, ‘जयप्रकाश का पूरा जीवन उनकी साधना और उनका संघर्ष, कुछ मूल्यों के साथ उनकी प्रतिबद्धता ये हमारी विरासत के अंग हैं. मैंने जयप्रकाशजी के अधूरे काम को पूरा करने का व्रत लिया है. हम राजनीति को कुछ मूल्योंपर आधारित करना चाहते हैं. राजनीति केवल कुर्सी का खेल नहीं रहना चाहिए.’ अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा, ‘भाजपा मुठभेड़ की राजनीति नहीं चाहती.. लेकिन अगर मुठभेड़ हमारे ऊपर थोपी गई तो हम उनसे कतराएंगे भी नहीं. भाषण के आखिरी चरण में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा, ‘हम छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और संघर्ष से प्ररणा लेंगे. सामाजिक समता का बिगुल बजाने वाले महात्मा फुले हमारे पथ-प्रदर्शक होंगे. भारत के पश्चिमी घाट को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर मैं यह भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं ‘अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा’ और अटल जी की ये बात आज सत्य साबित हो रही है जब केंद्र मैं पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा सत्ता में है वहीं लगभग राज्यों में उनके मुख्यमंत्री हैं.

Share This Post