अलविदा अटलजी: “अंधेरा छटा, सूरज निकला, कमल खिला… मेरा लक्ष्य पूरा हुआ अब में चला”

जब भी भातीय जनता पार्टी कोई भी चुनाव हारती है तो उसे भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का वो जीवंत, प्रेरणादायी उद्वोधन याद आता है जिसमें उन्होंने कहा था कि एक समय आएगा जब “अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा”. अटल जी का ये वाक्य भाजपा का तो ध्येय वाक्य बन ही चुका है लेकिन साथ ही हर उस व्यक्ति को प्रेरणा देता जो संकट की घड़ी में होता है, हताश होता है, निराश होता है. भारतीय जनता पार्टी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने वाले जन जन के प्रिय नेता, राष्ट्रपुत्र अटल बिहारी वाजपेयी दुनिया छोड़ चुके हैं जो श्रद्धेय अटल जी की कहानियां, उनकी स्मृतियों को याद किया जा रहा है, बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक अपने नायक के निधन से दुखी है तथा सारा हिंदुस्तान आंसुओं के सागर में डूबा हुआ है.

अटल जी ने परिकल्पना की थी कि एक दिन आएगा जब केंद्र में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सत्ता होगी, जब देशभर में भाजपा का कमल खिला होगा..अटल जी की ये संकल्पना वर्तमान राजनैतिक परिक्षेप्य में सार्थक हो चुकी है. केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा सत्ता में है. देशभर के लगभग 20 राज्यों में भाजपा व उसके सहयोगी सत्ता में है जो 1980 में भाजपा के प्रथम अधिवेशन में अटल जी के भाषण के उस वाक्य पर मोहर लगाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि “अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा” .. और आज देखिये भाजपा का अंधेरा छट चुका है, सूरज निकल चुका है और कमल खिल चुका है.

आज जब देश अटल जी को अंतिम विदाई दे रहा है तो अटल जी के इन्ही शब्दों को याद कर रहा है. भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता अटल जी को याद कर रहे हैं तथा रो रहे हैं. सोशल मीडिया पर अटल जी के लिए अनेक श्रद्धांजलि संदेशों की भरमार है. अटल जी के देहांत पर ऐसा लग रहा है जैसे अटल जी खुद कह रहे हों कि आज “भाजपा का अँधेरा छट चुका है, सूरज निकल चुका है कमल खिल चुका है. यही मेरा लक्ष्य था जो पूरा हो चुका है और अब में आप सबसे विदा लेकर अपने जीवन की अंतिम यात्रा पर जा रहा हूँ” .. अटल जी अब सिर्फ यादों में

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