स्वतंत्रता दिवस: जानिए उस नीलकुरुंजी फूल के बारे में जिसका जिक्र प्रधानमन्त्री श्री मोदी जी ने लाल किले से किया.. जो 12 साल में एक बार खिलता है

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लालकिले की प्राचीर से पांचवीं बार देश को संबोधित किया. सर पर केसरिया साफा बांधे प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी आपने भाषण के दौरान आत्मविश्वास से लबरेज नजर आ रहे थे. 15 अगस्‍त के मौके पर लाल किले की प्राचीर से पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने पांचवें भाषण की शुरुआत नीलगिरी के पुष्‍प की व्‍याख्‍या से की. उन्‍होंने कहा कि नीलगिरी की पहाड़ियों में 12 वर्षों में एक बार नीलकुरुंजी पुष्‍प खिलता है. ये नीले रंग के पुष्‍प होते हैं. ये कुछ उसी मानिंद होते हैं जिस तरह तिरंगे में अशोक चक्र स्थित होता है. उसको सूर्योदय की चेतना से जोड़ते हुए उन्‍होंने कहा कि देश आज आत्‍मविश्‍वास से भरा हुआ है.


सभी जानते हैं कि प्रधानमन्त्री मोदी जी अक्सर संकेतों में बात करते नजर आते हैं तथा ये उनका मजबूत पक्ष है. प्रधानमन्त्री मोदी जी के हर शब्द में कुछ न कुछ रहस्य छिपा नजर आता है. आपको बता दें कि पीएम मोदी ने इस बार नीलकुरुंजी पुष्‍प का जिक्र इसलिए किया क्‍योंकि 2006 के 12 साल बाद इस साल यह फिर से खिला है. इस तरह आजादी के बाद से लेकर अब तक यह केवल छह बार खिला है. इसका वैज्ञानिक नाम स्‍ट्रोबिलेनथेस कुंथीआनस (Strobilanthes kunthianus) है. यह दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट की नी‍लगिरी पहाडि़यों में 1300-2400 मी की ऊंचाई पर पाया जाता है. इसके जीवन चक्र का भी खास स्‍वरूप है. कुरुंजी या नीलकुरुंजी के कुछ फूल हर सात में पुष्पित होते हैं और उसके बाद उनकी मृत्‍यु हो जाती है. उनके बीजों के प्रसार से ही इन पुष्‍पों का जीवनचक्र चलता रहता है. आज जब 2018 में प्रधानमन्त्री ही लालकिले से देश को संवोधित कर रहे थे तो उन्होंने नीलकुरुंजी पुष्प का जिक्र किया तथा कहा कि आज देश एटीएम विश्वास से भरा हुआ है.

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