बर्तन धोकर, फेंके खाने को खाकर जिन्दगी गुजार रहा है कारगिल युद्ध का महानायक.. वो भी देश की राजधानी दिल्ली में

आज पूरा देश कारगिल विजय दिवस मना रहा है तथा नमन कर रहा है राष्ट्र के उन जांबाजों को जिन्होंने पराक्रम से, शौर्य से..यहां तक कि अपने प्राणों की आहुति देकर सर्द हिमालय की चोटियों पर वन्देमातरम, भारतमाता की जय के नारे लगाते हुए नापाक मुल्क पाकिस्तान को खदेड़ दिया था. लोकप्रिय हस्तियां, राजनेताओं से लेकर आम जनता तक कारगिल युद्ध के महानायकों को याद का रही है, उन्हें नमन कर रही है. लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा तथा आक्रोश के साथ आपकी आँखों से अश्रुधारा भी बह निकलेगी कि इसी कारगिल युद्ध का एक महानायक आज देश की राजधानी दिल्ली में जूठे बर्तन धोकर अपने घर का गुजारा करने को मजबूर है. स्थिति ये है कि इस महायोद्धा का परिवार कभी कभी अंत में बचा हुआ खाना खाने को मजबूर है. देश के दुश्मनों के छके छुड़ाकर तंगहाली की जिंदगी जी रहे इस योद्धा का नाम है सतवीर सिंह.

सतवबीर सिंह जो भरतीय सेना में लांस नायक थे. ये वही लांस नायक सतवीर सिंह हैं जिन्हें सरकारी सिस्टम ने यहां लाकर खड़ा कर दिया हैं. पहले पेट्रोल पंप का वादा, फिर 5 बीघा जमीन. अब गरीबी इतनी कि दुकान में बर्तन धोने पर मजबूर हैं. 19 साल बीत गए हैं. आज 26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस मना रहा हैं. शहीद जाबांज जवानों को को श्रद्धांजलि दी जा रही हैं, उन्हें याद किया जा रहा हैं. वहीं देश के ही एक वीर योद्धा सतवीर सिंह की हालत ऐसी हो गई की कोई सोच भी नहीं सकता है. देश की राजधानी दिल्ली में ये योद्धा सतवीर सरकार की नजर से दूर है, जो जूस की दुकान खोलकर खुद ही झूठे बर्तन धो रहा है. आपको बता दें आज भी इनके पैरों में 19 साल पहले की गोली धंसी हुई है. ये गोली पाकिस्तान सैनिकों की तरफ से किए गए हमले में लगी थी. इस गोली की वजह से ये ठीक से चल फिर भी नहीं सकते हैं. चलने के लिए एकमात्र सहारा है बैसाखी. सतवीर सिंह वो महायोद्धा हैं जिन्होंने कारगिल की लड़ाई में तो देश की जीत दिलाई, लेकिन खुद हार गए तो अपने हक के लिए, वो भी अपने ही सरकारी सिस्टम के आगे. आपको बता दें कि सतवीर सिंह दिल्ली के मुखमेलपुर गांव में रहते हैं. वह कारगिल युद्ध में दिल्ली के अकेले जाबांज है.

सतवीर सिंह ने बताया कि 13 जून 1999 की सुबह थी. कारगिल की तोलोलिंग पहाड़ी पर थे. तभी घात लगाए पाकिस्तानी सैनिकों से हमारा सामना हो गया. 15 मीटर की दूरी पर पाकिस्तानी सैनिक थे तथा पाकिस्तानी सैनिकों ने गोलीबारी शुरू कर दी. सतवीर ही अकेले करीब 9 सैनिकों को संभाल रहे थे. पाक सैनिकों पर उन्होंने ग्रेनेड फेंका. 6 सेकेंड के बाद जोरदार धमाके के साथ ग्रेनेड फट गया. ग्रेनेड हमले में 7 पाक सैनिक मारे गए. हालांकि इस हमले में देश के 7 जवान भी शहीद हो गए. दोनों तरफ से गोलीबारी जारी थी. सतवीर को कई गोलियों ने छलनी कर दिया था. उनमें एक पैर की एड़ी में आज भी फंसी हुई है. वह 17 घंटे तक पहाड़ी पर पड़े रहे. 17 घंटे तक खून बह चुका था.सतवीर ने बताया कि इस हमले में उनके पैर ही में 2 गोलियां लगी थीं. एक तो पांव से लगकर एड़ी से निकल गई और दूसरी पैर में ही फंसी रह गई. वह गोली आज भी उनके पैर में फांसी हुई है. पैर में गोली फंसी होने की वजह से करीब एक साल तक मेरा इलाज चला. 26 जुलाई को यह युद्ध भारत की जीत के साथ समाप्त हुआ. कारगिल के उन घायल योद्धाओं में लांस नायक सतवीर सिंह का भी नाम था. उस युद्ध में शहीद हुए अफसरों, सैनिकों की विधवाओं, घायल हुए अफसरों और सैनिकों के लिए सरकार में पेट्रोल पंप और खेती की जमीन मुहैया करवाने की घोषणा की थी.

सतवीर सिंह कहते हैं कि मुझे भी दूसरे जवानों की तरह पेट्रोल पंप मिलने वाला , लेकिन मुझे नहीं मिला. बाद में मुझे 5 बीघा जमीन दी गई, जिसमें मैंने फलों का एक बाग लगाया. लेकिन दुर्भाग्यवश वो जमीन भी मुझसे छिन ली गई. सतवीर सिंह के 2 बेटे हैं. पैसों की कमी की वजह से दोनों बेटों की पढ़ाई भी छूट गई. पेंशन और इस जूस की दुकान से घर का खर्च मुश्किल से चलता है. वह कहते हैं, ’13 साल 11 महीने नौकरी की। मेडिकल ग्राउंड पर अनफिट करार दिया. दिल्ली का अकेला सिपाही था. सर्विस सेवा स्पेशल मेडल मिला. सरकार ने जमीन व उस पर पेट्रोल पंप देने का वादा किया. उसी दरम्यान एक बड़ी पार्टी के नेता की तरफ से संपर्क किया गया. ऑफर दिया कि पेट्रोल पंप उनके नाम कर दूं. मैंने इनकार किया तो सब कुछ छीन लिया गया. 19 साल से फाइलें पीएम, राष्ट्रपति, मंत्रालयों में घूम रही हैं. आज तक कोई नहीं मिला. कोई मदद नहीं मिली, सम्मान नहीं मिला, हाँ लेकिन डिफेंस ने सम्मान बरकार रखा हैं. वह कहते हैं मुझे जमीन देने के तीन साल बाद मुझसे जमीन छीन ली गई तो वह हिम्मत हार गए कि अब सरकारी मदद की उम्मीद करना ही बेकार हैं.

Share This Post

Leave a Reply