क्या हैसियत है गैर मुसलमानों की पाकिस्तानी मजहबी उलेमाओं की नजर में.. इसे उन्होंने खुद बताया

अक्सर सुनने में आता है कि इस्लाम में गैर मुसलमानों को काफिर माना जाता है. लेकिन अब एक पाकिस्तानी उलेमा राजनेता ने गैर मुस्लिमों अर्थात काफिरों को लेकर ऐसा बयान दिया है जो धर्मनिरपेक्षता के उन तथाकथित ठेकेदारों को आईना दिखाने वाला साबित हो सकता है. इस पाकिस्तानी उलेमा ने गैर मुस्लिमों अर्थात काफिरों को तुलना जिससे की है उसे सुनकर धर्मनिरपेक्षता तथा भाईचारे की सारी मीनारें स्वतः ही ध्वस्त हो जाएंगी.

पाकिस्तानी उलेमा तथा राजनेता खादिम हुसैन रिजवी ने कहा है पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक अर्थात हिन्दू, सिख, ईसाई और अन्य बाकी गैर मुसलमानों से कोई ताल्लुकात मत रखो क्योंकि ये सभी गैर मुस्लिम लोग काफिर हैं. हुसैन रिजवी ने कहा कि मुसलमानों को काफिरों से कोई संबंध नहीं रखना चाहिए क्योंकि काफिरों का दर्जा इस्लाम में निम्नस्तरीय है. खादिम हुसैन रिजवी यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने गैर मुस्लिमों खासकर हिन्दुओं को निशाने पर लिया तथा काफिरों की तुलना मानव मल से की. खादिम हुसैन रिजवी ने कहा कि काफिरों से ताल्लुक मत रखो लेकिन अगर रखना भी पड़ रहा है तो, सिर्फ इतना रहे जितना लैटरीन के अंदर जाना मजबूरी है. लैटरीन के साथ जितना ताल्लुकबंदी है उतना उनसे भी रखो.

खादिम हुसैन रिजवी ने इससे भी आगे जाकर हिन्दुओं को निशाने पर लिया.  उन्होंने हिंदुओं से संबध रखने वाले लोगों से कहा कि अगर काफिरों से इतना ही प्रेम है तो हिंदु बन जाओ. खादिम ने आगे कहा कि लोग कहते हैं कि जन्नत क्या है और जहन्नुम क्या है. मैं बता दूं कि इसका फैसला कोई मौलवी या मुल्ला नहीं बल्कि खुद अल्लाह रसूल करता है और उन्होंने फैसला कर दिया है कि जन्नत मुस्लिमों को तौफीक होगी और हिंदुओं को जहन्नुम. उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा कि हिंदुओं के एजेंट मत बनो तथा जनत में जाना है हिन्दुओं को खुद से अलग कर दो क्योंकि हिन्दुओं को कभी जन्नत नहीं मिलेगी.

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