भले ही भारत बंद में लगा रखा था जाम पर जब दिखी एक एंबुलेंस तो दिखाया वो रूप कि मरीजों के परिजनों ने भी जोड़ लिए हाथ


 SCST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को तथाकथित दलित हितैषी संगठनों ने भारत बंद किया. पूरे देश ने देखा कि किस तरह से भारत बंद की आड़ में हिंदुस्तान को हिंसा की आग में झोंक दिया गया था. देश के विभिन्न हिस्सों में मारपीट, लूट, दंगे, आगजनी  हुई थी, स्कूल जाती छात्राओं की बसों पर हमले किये गये थे तो ऑटो में जाती महिला तथा उसके बच्चे पर हमला किया गया था. यहाँ तक पुलिस थानों पर हमला कर के आग लगाई गयी, पुलिस वालों को पीटा गया तथा राजस्थान पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर की जान भी ले ली गयी थी. बाद में केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों के दवाब में आकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया.

SCST एक्ट पर सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटकर एक्ट को गैर जमानती बनाये जाने से सवर्ण तथा ओबीसी समाज नाराज हो गया जिसके बाद आज 6 सितंबर को सवर्ण संगठनों की तरफ से भारत बंद किया गया. लेकिन मानवता क्या होती है, इंसानियत क्या होती है तथा देश से प्यार क्या होता है ये सब आज के भारत बंद के दौरान दिखाई दिया. उत्तर प्रदेश के बांदा जिला मुख्यालय में मानवता की तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट) में संशोधन का विरोध कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के बीच जाम में एक मरीज को ले जा रही एंबुलेंस फंस गई. इसके बाद जो हुआ वो उन लोगों को जवाब था जो आन्दोलन के नाम पर हिंसा आगजनी करते हैं, लोगों की जान लेते हैं. आन्दोलनकारियों ने आन्दोलन को रोक दिया तथा एंबुलेंस को शांति ससे गुजर जाने दिया, इसके बाद मरीज ने परिजनों ने आन्दोलनकारियों का धन्यवाद किया.

बांदा के अपर पुलिस अधीक्षक लाल भरत कुमार पाल ने बताया कि गुरुवार की दोपहर अर्धनग्न प्रदर्शनकारियों के जाम में गंभीर रूप से बीमार एक मरीज को लिए जा रही एंबुलेंस अशोक लॉट तिराहे के पास फंस गई गई थी, लेकिन मानवता की मिसाल पेश करते हुए प्रदर्शनकारियों ने उसे न केवल रास्ता दिया, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ की जा रही नारेबाजी भी कुछ देर के लिए बंद कर दी थी, ताकि मरीज को शोर-शराबे से दिक्कत न हो.” उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकरियों ने सड़क को भी पूओरी तरह ससे खाली कर दिया जो एक बहुत अच्चा निर्णय था.  उन्होंने बताया कि बांदा जिला मुख्यालय में भारत बंद का मिला-जुला असर रहा लेकिन स्सबसे अच्छी बात ये रही कि आन्दोलन के दौरान कहीं से बी हेई हिंसा की खबरें नहीं आयी तथा प्रदर्शनकारी शांतपूर्वक आंदोलन कर घर लौट गए.


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