#कठुआ गैंगरेप…. जो दिखाया जा रहा है वो “अर्धसत्य है पूर्ण नहीं”

आज क्रोधित होने, आक्रोशित होने और सवाल पूछने का दिन है. कठुआ की 8 साल की जिस बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ और हत्या हुई, उसे न्याय तभी मिलेगा, जब इस मामले का पूरा सच बाहर आएगा. परंतु दुख की बात ये है कि, सच की चिंता किसी को नहीं है तथा सबको अपनी राजनीति और अपने एजेंडे की फिक्र है. अब तक इस मामले में आपको केवल आधा सच ही बताया गया है. आपने इस पूरे मामले को लेकर कई तरह के सिद्धांतों को पढा और सुना होगा परंतु इस पूरे मामले में तथ्यों की जांच किसी ने नहीं की है. सब सुनी सुनाई बातों के आधार पर अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे है तथा ऐसे नाजुक समय में कुछ लोग बडी चालाकी से इसे धार्मिक रंग दे रहे हैं और अपना एजेंडा चला रहे हैं. जिन लोगों ने 8 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की, वो तो गुनहगार हैं हीं, परंतु इसके साथ साथ, वो लोग भी गुनहगार हैं, जिन्होंने इस पूरे मामले को धार्मिक रंग दिया और राजनीतिक रंग दिया.

आधी अधूरी सूचनाओं के इस जाल में असली खबर को खोजना और उसमें छिपे सत्य को समझना बहुत मुश्किल होता है. यहाँ समझना जरूरी है कि इस पूरे मामले की कुंजी है, कश्मीर क्राइम ब्रांच की चार्जशीट, क्योंकि इस चार्जशीट के आधार पर ही सारा खेल हुआ है तथा सवाल खड़े हुए हैं. और जब इस चार्जशीट में लिखे एक एक शब्द को पढा गया तथा उसकी तहकीकात की गई उसके आधार पर जो बात सामने आई है उसको जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे जो तथ्य समनर आये हैं वो इस चार्जशीट पर सवाल खड़े करते हैं कि एक साजिश तथा षड्यंत्र के तहत इस मामले में अनर्गल चीजें लिखी गयी हैं तथा यही कारण है कि आरोपी पक्ष CBI जांच तथा नार्को टेस्ट की मांग कर रहा है.

गौरतलब है कि कठुआ रेप और मर्डर केस में उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई. उच्चतम न्यायालय में कठुआ रेप केस में पीडित के पिता ने याचिका दायर की है और इस केस को कठुआ से चंडीगढ ट्रांसफर करने की अपील की है. इस याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस जारी करके, जवाब मांगा है. पीडित के पिता की वकील की आेर से कहा गया है, कि जम्मू कश्मीर में निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती है इसलिए इस केस को जम्मू कश्मीर के बाहर ट्रांसफर किया जाए. अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी. इस पूरे मामले में सीबीआई जांच की मांग की जा रही है क्योंकि आरोपियों के परिवार को कश्मीर क्राइम ब्रांच की जांच पर भरोसा नहीं है.
यहां ये जानना भी जरूरी है कि कश्मीर क्राइम ब्रांच की जिस चार्जशीट के आधार पर मामला तूल पकड़ा है तथा गिरफ्तारियां हुई हैं उसे लेकर कठुआ के रासना गांव के लोगों ने बहुत से सवाल उठाए हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि ये हर कोई कह रहा है कि 8 साल की बच्ची को किसी भी हाल में न्याय जरूर मिलना चाहिए और इस दुनिया में जो भी सबसे कडी सजा है, वो उसके हत्यारों को मिलनी चाहिए. परंतु रासना गांव के लोगों के सवालों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ! इस मामले में 8 साल की बच्ची को न्याय तब मिलेगा जब सारे सवालों और शंकाओं को तथ्यों की मदद से खत्म कर दिया जाएगा.
कश्मीर क्राइम ब्रांच की चार्जशीट पर गांववालों ने सवाल उठाया है कि जिस एक कमरे के मंदिर में चार खिडकियां हों, जिसके तीन दरवाजे हों, और हर रोज तीन गांवों के लोग जहां पूजा-अर्चना करते हों, वहां किसी लडकी को बंधक बनाकर कैसे रखा जा सकता है ? लोगों का ये भी सवाल है कि कोई पिता अपने बेटे और अपने नाबालिग भांजे को  एक मासूम बच्ची का रेप करने के लिए कैसे कह सकता है ? बच्ची का शव जिस जगह पर मिला, वो जगह आरोपी सांझीराम के घर के पास है, इसलिए लोग ये सवाल भी उठा रहे हैं कि सांझीराम ने लडकी की हत्या के बाद उसका शव अपने घर के पास ही क्यों फेंका ?
स्थानीय लोगों की मानें तो 15 जनवरी को इस देवीस्थान में एक भंडारा भी हुआ था. यहां समझना जरूरी है कि क्राइम ब्रांच की चार्जशीट में ये लिखा है कि 15 जनवरी तक लडकी इसी देवीस्थान में मौजूद थी. ऐसे में सवाल उठता है कि भंडारे में शामिल सैकडों लोगों ने उस लडकी को क्यों नहीं देखा ? विशाल नाम के जिस आरोपी को क्राइम ब्रांच ने पकडा है, उसके बारे में कहा जा रहा है कि वो इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में था और वहां एक कॉलेज में परीक्षा दे रहा था, इस बात की पुष्टि उस मकान मालिक ने भी की है जिसके मकान में विशाल रह रहा था. ऐसे में आरोपी एक ही समय में दो जगहों पर कैसे मौजूद हो सकता है ?
ये बात भी सच है कि पहले इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी और फिर बाद में ये पूरी जांच कश्मीर की क्राइम ब्रांच को दे दी गई तथा इसके बाद ही इस पूरी घटना की कहानी बदल गई. आश्चर्यजनक रूप से कश्मीर की क्राइम ब्रांच में एक ऐसा अधिकारी भी शामिल था, जिस पर खुद रेप और हत्या का आरोप था, इसके अलावा उस अफसर के हुर्रियत के नेताओं से भी अच्छे रिश्ते बताए जाते हैं. स्थानीय लोगों का ये भी कहना है कि जब ये जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई, तो क्राइम ब्रांच ने रासना गांव के कई लोगों को थाने में बंद करके उन्हें टॉर्चर किया. इस पूरे मामले की एक महत्वपूर्ण कडी तालिब हुसैन नाम का एक व्यक्ति भी है जिसने इस बच्ची के लिए हाईवे को जाम करके प्रदर्शन किया था. तालिब एक एनजीओ चलाता है और उसके बारे में ये भी कहा जाता है कि वो जम्मू में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का एजेंडा फैलाता है.
लोगों का आरोप है कि बच्ची के माता-पिता शुरुआत में सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे परंतु तालिब हुसैन ने पीडित के घरवालों को क्राइम ब्रांच की जांच के लिए उकसाया. इसीलिए गांव के लोगों का कहना है कि वह अब इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं ताकि पूरा सच सामने आए और दोषियों को सजा मिले.  यहां हम एक बार फिर ये कहना चाहते हैं कि 8 साल की बच्ची के साथ जो कुछ हुआ उसका हमें बहुत दुख है तथा हम इस घटना से व्यथित हैं तथा मांग करते हैं कि इस मामले में दोषियों को दुनिया की सबसे कडी सजा मिलनी चाहिए लेकिन ये सजा सत्य और तथ्य के आधार पर मिलनी चाहिए न कि एजेंडे के आधार पर और ये सत्य तथा तथ्य तो सीबीआई जांच में ही सामने  आ पायेगा क्योंकि क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट तो एक तरह से इस मामले को कम्यूनल रूप दे चुकी है जो इस देश की एकता तथा अखंडता के लिए घातक है क्योंकि देश में जब सत्य तथा तथ्य के बजाय एजेंडा चलने लगता है तो कई बार सच न सिर्फ बहुत धुंधला हो जाता है बल्कि सच दबा दिया जाता है व भ्रामक व साजिशन बनाये गए एजेंडे के आधार पर आया न्याय कोई न्याय नहीं होता बल्कि वह सत्य, धर्म तथा राष्ट्र के पतन की एक सीढ़ी होता है.

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