मोदी के लिए ईसाई संघ का ऐसा बयान जो सतर्क कर गया देश को और एक कर रहा हिन्दू संगठनों को

कुछ दिनों पहले ही दिल्ली के चर्च के आर्क बिशप तथा उसके बाद गोवा के आर्क बिशप ने केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ ईसाइयों को संगठित होने का आह्वान किया था, जिसकी हिन्दू संगठनों ने तीखी आलोचना की थी. लेकिन अब एक बार फिर से मोदी सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ है राष्ट्रीय ईसाई महासंघ तथा कहा है कि मोदी सरकार आरएसएस के एजेंडे पर चलकर देश के लोकतान्त्रिक मूल्यों को कुचल रही है. ईसाई महासंघ के बयान पर हिन्दू संगठन उबल पड़े हैं तथा कहा है कि जब अन्य धर्म वाले मोदी सरकार के खिलाफ फतवा दे सकते हैं तो हम भी खुलकर मोदी सरकार के समर्थन में है.

आपको बता दें कि झारखण्ड की रघुवर दास के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने धर्म बदलकर ईसाई बनने वाले लोगों को आरक्षण से बहार ली कवायद शुरू की है तथा कहा है कि जातिगत आरक्षण तभी तक है जब तक आप अपना धर्म नहीं है और जब आपने अपना धर्म बदल लिया है तब आपका आरक्षण पर कोई अधिकार नहीं बनता. धर्म बदलने पर आरक्षण खत्म किए जाने की सरकार की कवायद के बीच रविवार को राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने सरकार पर हमला बोला. राजधानी के xiss सभागार में आयोजित एक रैली में राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने कहा कि झारखंड की सरकार ईसाई समुदाय को एक साजिश के तहत बदनाम करना चाहती है. राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने कहा कि आरएसएस के ईशारे पर ही पूरी साजिश रची जा रही है ताकि कोई जमीन का मसला ना उठाए.

राष्ट्रीय ईसाई महासंघ ने कहा कि सरकार को क्रिस्टोफोबिया हो गया है. सरकार ईसाई समुदाय से डरने लगी है. महासंघ ने कहा कि खूंटी में आज जो कुछ भी हो रहा है वो ग्रामीणों द्वारा अपनी जमीन बचाए जाने की कवायद है. ईसाई महासंघ का आरोप है कि सरकार द्वारा बनाए गए लैंडबैंक में सबसे ज्यादा खूंटी के जमीन को शामिल किया गया है. साथ ही एक साजिश के तहत धर्म बदलने वालों को आरक्षण से वंचित करने की कोशिश की जा रही है.
राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के राष्ट्रीय सचिव डॉ. क्रिस्टी अब्राहम ने कहा कि यह आरएसएस का चलाया गया मुहिम है कि ईसाइयों के खिलाफ लगातार बोलते जाइए और इस प्रकार उन्हें अलग कर दीजिए. उन्होंने कहा कि आरएसएस की नीति समझ में नहीं आ रही है. वहीं राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की ने कहा कि धर्म, नस्ल, रंग और वर्ण के आधार पर किसी भी नागरिक को उसके मूलभुत अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है.

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