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सामने आ गया वो सारा सच जिसमें तिल-2 कर तड़पाया गया विकास मिश्रा को क्योंकि वो एक हिन्दू था.. अफ़सोस सरकार ने भी उसकी नहीं सुनी

आखिरकार वो सच सामने आ ही गया जो कल से ही मीडिया की सुर्खियां बना हुआ था. एक मुस्लिम व्यक्ति अनस सिद्दीकी तथा उसी पत्नी लखनऊ पासपोर्ट ऑफिस में अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने गए तो बाहर आकर अनस ने आरोप लगाया कि ऑफिस में एक अधिकारी विकास मिश्रा ने उन्हें धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया तथा कहा कि जब अनस ने हिन्दू लड़की से शादी की है तो अनस को हिन्दू धर्म अपना लेना चाहिए. इस खबर के सामने आने के बाद अधिकारी विकास मिश्रा कि जमकर आलोचना हुई तथा एक तरह से विकास को एक विलेन साबित कर दिया गया. तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदार तथा मीडिआ ने विकास मिश्रा के खिलाफ अभियान चला दिया. लेकिन अब खुद विकास मिश्रा ने सामने आकर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा है तथा इसके बाद जो सच सामने आया है वो हैरान करने वाला है.

विकास मिश्रा ने कहा कि जो हो रहा है वो गलत हो रहा है. विकास मिश्रा ने कहा कि उन्होंने कभी धर्म बदलने के लिए नहीं कहा बल्कि हमने जो जरूरी होता है वो पूंछताछ की. इसके बाद खुद अनस सिद्दीकी ने उनको धमकाया तथा कहा कि वह बहुत सक्षम हैं तथा उसको देख लेंगे, पुलिस में शिकायत करेंगे. विकास मिश्रा ने कहा, ‘हमें धर्म से कोई मतलब नहीं, हमें तो पासपोर्ट के मैनुअल के मुताबिक फैसला लेना होता है, जिसमें आवेदक द्वारा दी गई जानकारी को कॉलम वाइज पुष्टि करनी होती है. उस फैसले के तहत निवेदक को अपना नाम स्पष्ट करना चाहिए था क्योंकि उस पर उनका पुराना नाम था.’ आरोपी अधिकारी ने कहा, ‘निवेदक नोएडा की रहने वाली थीं, उन्हें गाजियाबाद मे अप्लाई करना चाहिए था. लेकिन उन्होंने उस तथ्य को छिपाया और लखनऊ का पता दिखाकर पासपोर्ट लेने के लिए निवेदन किया जो कि गलत था. उन्होंने गलत जानकारी दी.’ विकास मिश्रा ने कहा, ‘आप हमारे पासपोर्ट के वेबसाइट पर मौजूद फॉर्म को देखेंगे तो पाएंगे कि वहां एक कॉलम है कि ‘हैव यू एवर चेंज योर नेम’ मतलब क्या आपने कभी अपने नाम में बदलाव किया है. उन्हें इस कॉलम में हां करते हुए पुराना नाम देना चाहिए था. जैसे ही वो हां में जवाब देतीं तो सिस्टम से ऑटोमेटिक एक इनक्वैरी जारी होती जिसके बाद उनसे उनके पुराने नाम की मांग की जाती.’

नाम के सवाल पर आरोपी अधिकारी ने कहा, ‘नाम पूछने पर दंपति ने निकाहनामा दिखाया जिसमें सादिया हसन नाम था लेकिन उस नाम को वो आवेदन पत्र में शामिल नहीं कराना चाहती थीं. इसके बाद मैंने उनसे आवेदन पत्र में नाम चढ़ाने के लिए आग्रह किया तो उन्होंने इसके लिए मना कर दिया. इसके बाद हमने मामले को एपीओ अधिकारी के पास भेज दिया. उन्होंने दंपति से पूछा कि आप नोएडा में रहती हैं तो पता चढ़ाने के लिए क्यों मना कर रही हैं. लेकिन दंपति ने वहां भी मना कर दिया. जिसके बाद एपीओ ने उनकी फाइल को यहां के पॉलिसी सेंटर भेज दिया.’ ये पूछे जाने पर कि क्या आप दंपति पर धर्म को लेकर चिल्लाए और बदसलूकी की, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मैं उनके ऊपर नहीं चिल्लाया बल्कि वो यहां दफ्तर में चिल्ला रहे थे. साथ ही उन्होंने हमें धमकी भी दी कि हम सक्षम लोग हैं, हम पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज करवाएंगे. हम नोएडा में जरूर रहते हैं लेकिन हम लखनऊ के पते पर रिपोर्ट लिखवा लेंगे जिसके बाद आपको गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा.
विकास मिश्रा ने कहा कि इसके बाद उन्हें पता चला कि मीडिआ उनके खिलाफ अभियान चला रहा है जबकि उन्होंने ईमानदारी के साथ अपनी ड्यूटी की है. विकास मिश्रा के अनुसार, मुझे देख लेने की, परिणाम भुगतने की धमी दी गई तथा उलटे मुझे ही विलेन बना दिया गया. विकास मिश्रा ने कहा कि उनके साथ काफी गलत हो रहा है जबकि उनकी कोई गलती नहीं है. आश्चर्य की बात ये है कि सरकार ने मांमले की जाँच पड़ताल के बिना विकास मिश्रा का तबादला कर दिया. इस आधार पर तो बिना जाँच पड़ताल के पासपोर्ट बनने लगें तो कोई आतंकी भी बड़ी आसानी से पासपोर्ट बनवा लेगा. आखिर ईमानदारी से ड्यूटी करने को सजा मिलने लगेगी तो कौन अधिकारी ईमानदारी से काम कर पायेगा.

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