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अटल बिहारी जी के स्वर्गवास पर जिन मुस्लिमों ने दुःख जताते हुए फातिहा पढ़ा,, उनके लिए किसी कहर से कम नहीं ये फरमान

16 अगस्त २०१८… ये वो दिन था जब भारतीय राजनीति के अजातशत्रु भारतरत्न पूर्व प्रधानमन्त्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आखिरी सांस ली तथा भारतीय राजनीति का एक ज्वलंत सितारा तथा लोकनायक इस दुनिया को छोड़ देवलोकगमन कर गया. अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर सुनते ही पूरा देश शोक में डूब गया तथा अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा था. पूरे देश ने अपने अपने तरीके से अटल जी को श्रद्धांजलि दी थी. मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने भी अटल जी के लिए फातिहा पड़ा था तथा उनके लिए प्रार्थना की थी. लेकिन अब एक मौलाना के द्वारा अटल जी के लिए फातिहा पढने वालों के खिलाफ ये कहकर फतवा जारी कर दिया गया है गैर मुस्लिम के लिए फातिहा पढ़ना इस्लाम में गुनाह है.

घटना जम्मू कश्मीर की है. पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं के उनका फातिहा पढे़ जाने पर कश्मीर के एक इस्लामिक विद्वान मौलाना अब्दुल रशीद दाऊदी ने ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ऐसा किया है वह मुसलमान नहीं हैं. उन्होंने चंद पैसों के लिए अपना दीन ईमान बेच दिया है. मौलाना दाऊदी एक वायरल वीडियो में बोल रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कहा कि जिन्होंने ऐसा किया है वो शरीयत और कुरान के फतवा के चलते दायरे इस्लाम से खुदबखुद बाहर हो जाते हैं. इतना ही नहीं वो यह भी कह रहे हैं कि अटल जी का फातिह पढ़ने वाले काफिर बन गए, और जब वह काफिर हैं और उनकी बीवियां मुसलमान तो ऐसे में उनका निकाह भी खुदबखुद टूट जाता है. यह सब शरीयत के अनुसार है और इसके लिए किसी मुफ्ती की जरूरत भी नहीं पड़ती. उन्होंने कहा कि अब ऐसी सूरत में उन्हें मुसलमान बनने के लिए फिर से कलमा और फिर से निकाह पढ़ने की जरूरत है. मौलाना ने कहा है कि जब तक ये लोग फिर से कलमा पढ़कर मुसलमान नहीं बनते तथा दोबारा से निकाह नहीं बनते तब तक वह काफिर रहेंगे.

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