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सदियों से चली आ रही एक और प्रथा बंद करेगी मोदी सरकार जिसमें पीड़ा झेलती थी नारियां… बदलने वाला है इतिहास

नारी सुरक्षा तथा नारी स्वाभिमान के लिए प्रतिबद्ध प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार मुस्लिम महिलाओं को अंतहीन प्रताड़ना देने वाली सदियों पुरानी हलाला व बहुविवाह प्रथा पर रोक लगाने वाली है. खबर के मुताबिक़, मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला और बहुविवाह के प्रथाओं का विरोध करने के लिए तैयार है. माना जा रहा है कि वह ट्रिपल तालाक की सुनवाई के दौरान जैसा स्टैंड लिया था, वैसा ही इस मामले में ले सकती है. यह जानकारी कानून और न्याय मंत्रालय के उच्चस्तरीय सूत्रों ने दी है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि इसमें कुछ भी बदलने की आशंका नहीं है. हलाला और बहुविवाह के मुद्दे को ट्रिपल तलाक के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुना था. हालांकि, तब भी इस मामले में हमारा जवाब तैयार था. तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने मई 2016 में ट्रिपल तलाक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से पहले दिन कहा था कि अदालत केवल ट्रिपल तालक पर तर्क सुनेगी, न कि हलाला और बहुविवाह पर. इस साल मार्च में सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस चंद्रचूड़ की तीन न्यायाधीशीय खंडपीठ ने बहुविवाह और निकाह हलाला प्रथा को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय, समीरा बेगम, नफीसा बेगम और मौलिम मोहसिन बिन हुसैन बिन अब्दाद अल कथिरी ने इस मामले में याचिका दायर की थी.

अपनी याचिका में वकील अश्विनी उपाध्याय ने गुजारिश की है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम की धारा 2 को असंवैधानिक घोषित किया जाए. यह बहुविवाह और निकाह हलाला को मान्यता देता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करता है. उपाध्याय ने कहा कि भारतीय दंड संहिता के प्रावधान सभी भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं. ट्रिपल तालक आईपीसी की धारा 498 ए के तहत “क्रूरता” है, निकाह हलाला धारा 375 के तहत “बलात्कार” और बहुविवाह धारा 494 के तहत एक अपराध है.

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