ममता ने मीटिंग के लिए साफ़ इनकार करते हुए कहा– “तुम्हें नहीं पता कि ईद है”

पश्चिम बंगला की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कितनी ज्यादा मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करती हैं, ये किसी से छिपा नहीं है. याद कीजिए वो दिन जब ममता बनर्जी के स्वामित्व वाले राज्य पश्चिम बंगाल में समुदाय विशेष(मुस्लिम) कोम खुश करने के लिए हिंदुओं के पवन पर्व श्री रामनवमी की शोभायात्रा पर रोक लगाई गयी थी/ याद कीजिए कि किस तरह दुर्गापूजा को ममता रोकती थी. कोई नहीं भूला होगा हनुमान जयन्ती शोभायात्रा को लेकर ममता बनर्जी का रुख, जब इस यात्रा पर ये कहकर रोका जाता था कि माहौल खराब होगा. आज ममता बनर्जी की छबि देश में सबसे बड़ी मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली नेता की बन चुकी है.

लेकिन एक बार फिर से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख तथा बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी छबि में एक और नगीना जड़ लिया है. खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 16 जून को दिल्ली में होने वाली नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्रियों और नीति आयोग के सदस्यों के साथ ‘न्यू इंडिया 2022’ के विकास के एजेंडे पर चर्चा होनी है व इसके अलावा महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोहों के मसले पर भी विचार विमर्श किया जाएगा. ममता ने यहां कहा, ‘मैं नीति आयोग की बैठक में हिस्सा नहीं लूंगी क्योंकि यह बैठक ईद के दिन बुलाई गई है इसलिए में ईद पर राज्य से बाहर नहीं जा सकती हूँ.

ममता बनर्जी के फैसलें पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि ईद के मौके पर आयोग की बैठक के लिए दिल्ली न जाकर ममता बनर्जी राज्य के अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय को संदेश देना चाहती हैं कि सरकार उनके त्योहारों के प्रति काफी गंभीर है. बता दें कि ईद के मौके पर ममता खुद भी महानगर के रेड रोड इलाके में होने वाले कार्यक्रम में अल्पसंख्यकों के साथ शामिल होती रही हैं. ये वही ममता हैं जो रामनवमी, दुर्गा पूजा, हनुमान जयंती पर तो रोक लगाती हैं लेकिन ईद के कारण प्रधानमन्त्री की मीटिंग में नहीं जा सकती हैं.

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